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वर्ल्ड फैलोशिप ऑफ बुद्धिस्ट्स का सम्मेलन श्री लंका में 25 मई से 6 जून, 1950 तक आयोजित हुआ था। डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने सम्मेलन में भाग लिया था।
6 जून, 1950 को कोलंबों में अंतराष्ट्रीय जनसमूह को संबोधित करते हुए डॉ. अम्बेडकर ने कहा था -
‘‘जिन लोगों ने भारत में बौद्ध धर्म के उत्थान और पतन का अध्ययन किया है, उनमें से ज्यादातर लोग यह मानेंगे कि इस विषय पर समुचित ढंग से वैसी चर्चा नहीं हुई है, जैसी होनी चाहिए थी। बौद्ध धर्म इतनी ऊँचाइयों पर कैसे पहुँचा और फिर भारत में यह कैसे विलुप्त हो गया, इसके बारे में मुझे कोई प्रामाणिक सामग्री नहीं मिल पाई है।
‘‘किसी विषय को गहनता से जानने के लिए उसकी सुसंगत परंपराओं को ठीक और सुरुचिपूर्ण ढंग से जानना आवश्यक है। इसी प्रकार बौद्ध धर्म की महत्ता भी तब तक समझ में नहीं आएगी, जब तक इस धर्म को जन्म देने वाली वास्तविक परिस्थितियों को न समझ लिया जाए। भारत में हिंदू धर्म सामाजिक विचारधारा की नवीनतम घटना है।
‘‘भारत के धर्म में तीन परिवर्तन हुए। सबसे पहले वैदिक धर्म माना जाता था, बाद में उसके स्थान पर ब्राह्मण धर्म आया और फिर हिंदू धर्म। बौद्ध धर्म का जन्म ब्राह्मण काल में हुआ था। इसका कारण यह था कि बौद्ध धर्म असमता, निरंकुशता और विभिन्न वर्गों में समाज के विभाजन का विरोध करता था, जिसका प्रारंभ भारत में ब्राह्मण धर्म द्वारा किया गया था।
‘‘वैदिक धर्म का पालन करना आसान है। इसमें यज्ञ करना मुख्य पूजा है। वैदिक आर्य असंख्य देवताओं की पूजा करते थे। वे यज्ञ करके उन्हें प्रसन्न किया करते थे। इन देवताओं के लिए की जाने वाली पूजा अवश्यमेव पवित्र और सर्वोपरि होनी चाहिए। भू-संपदा के उस काल में गायें आर्यों की मुख्य संपदा थी। अतः वे