120. 6.6.1950 बौद्ध धर्म से लोकतंत्र और समाजवादी पद्धति के समान का मार्ग प्रशस्त हुआ। - Page 409

388 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

भिक्षुओं के अभाव के कारण बौद्ध धर्म का पतन हुआ। बौद्ध धर्म का पुनरुत्थान करने के लिए एक दूसरा पुजारी वर्ग खड़ा करने के लिए कुछ बौद्धों ने बाद में प्रयास किए थे, किंतु उनके प्रयास असफल रहे। लेकिन हिंदू धर्म के साथ यह बात नहीं है। ब्राह्मण का बेटा जन्म से पुजारी होता है, इसलिए उनके धर्म को बचाने के लिए कोई पृथक, पुजारी समुदाय आवश्यक नहीं है। यही कारण है कि हिंदू धर्म मुस्लिम आक्रमण के बाद भी बचा रहा। इसके अलावा बौद्ध धर्म एक ऐसा धर्म है, जिसका पालन करना कठिन है जबकि हिंदू धर्म ऐसा नहीं है। इसके अतिरिक्त भारत में राजनीतिक वातावरण भी बौद्ध धर्म की प्रगति के लिए अनुकूल नहीं था।

‘‘मैं भारत में अनेक लोगों के इस सुझाव से सहमत नहीं हूँ कि शंकराचार्य की तर्क विद्या के कारण बौद्ध धर्म समाप्त हुआ था। यह तथ्यों के प्रतिकूल है, क्योंकि बौद्ध धर्म शंकराचार्य के निधन के बाद भी कई शताब्दियों तक विद्यमान रहा। मेरी राय में शंकराचार्य भी बौद्ध थे। उनके गुरू भी बौद्ध थे। यह ठीक है कि भारत में वैष्णव धर्म और शैव धर्म के उदय के कारण बौद्ध धर्म का पतन हुआ था। ये दो ऐसे धर्म थे जिन्होंने बौद्ध धर्म की अनेक अच्छी बातों को अपना लिया था और अपने धर्म में मिला लिया था। आज हिंदू धर्म एक बहुत ही परिवर्तित रूप में विद्यमान है। पहले हिंदू धर्म हिंसा की शिक्षा देता था और हिसां करता था। अब उसने अहिंसा का पाठ पढ़ाना शुरू कर दिया है। यह तत्व बौद्ध धर्म से लिया गया है। बौद्ध धर्म भौतिक रूप से भले ही अदृश्य हो गया हो, किंतु आध्यात्मिक शक्ति के रूप में यह आज भी भारत में विद्यमान है।’’ ख्1,

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1 बौद्धधर्म ही मानव धर्म (मूल हिंदी में) - स्पीच ऑफ कोलंबो (श्रीलंका) 6.6.1950,

पुनर्मुद्रित : डॉ. अम्बेडकर ऑन बुद्धिज्म : संपादक डी.सी. अहीर, पृष्ठ 111-114.