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मैं अपना शेष जीवन बौद्धधर्म के पुनरुत्थान और उसके प्रसार
भारत सरकार के विधि मंत्री डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने लोगों से बौद्धधर्म अपनाने की अपील की।
उन्होंने कहा ‘‘वर्तमान बौद्धधर्म लगभग 2000 वर्ष पहले भी ऐसा ही था’’ और अब भी बौद्धधर्म है, लेकिन मुस्लिम आक्रमण के बाद और अन्य कारणों से इसकी विशुद्धता खत्म हो गई है और इसमें कूडा-कड़कट मिल गया है।’’
डॉ. अम्बेडकर ने 29 सितंबर, 1950 (शुक्रवार) की रात को वर्ली में बंबई के बुद्ध मंदिर में बोलते हुए इस विचार की निन्दा की कि राजनीतिक स्वाधीनता से देश की सारी बुराइयाँ खत्म हो जाएगी। उन्होंने कहा, ‘‘जब तक विचार निर्मल न हों तब तक रोजमर्रा के जीवन में गलत काम और आचार के नियमों के प्रति पूर्ण तिस्कार बना रहेगा। जब तक आदमी को यह मालूम न हो कि आदमी के साथ कैसा बर्ताव करना है और वह आदमी-आदमी के बीच अवरोध पैदा करे तब तक भारत कभी भी समृद्ध नहीं हो सकता।
‘‘इन सब मुसीबतों को खत्म करने के लिए भारत को निश्चय ही बौद्धधर्म अपना लेना चाहिए। बौद्धधर्म ही ऐसा धर्म है, जो नैतिक नियमों पर आधारित है और सिखाता है कि आम आदमी की भलाई और अच्छाई के लिए कैसे काम किया जाए।’’
डॉ. अम्बेडकर ने घोषणा की कि वह अपना शेष जीवन भारत में बौद्धधर्म के पुनरुत्थान और प्रसार में लगाएँगे। ख्1,
1 द संडे न्यूज, 1 अक्तूबर, 1950.