5. 8.8.1930 एक देश, एक संविधान एक और भाग्य की भावना से जुड़े लोग स्वाधीन होने का जोखिम उठाते हैं। - Page 42

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है कि दलित वर्ग के पर्याप्त प्रतिनिधित्व के अधिकार को मान्यता प्रदान की

जाये।

  1. यह अधिवेशन खेद व्यक्त करता है कि साइमन आयोग ने राज्य सभाओं

में दलित वर्ग के प्रतिनिधित्व के लिए कोई प्रावधान नहीं रखा और यह

मांग करता है कि दलित वर्ग की राज्य सभाओं में पर्याप्त प्रतिनिधित्व के

अधिकार को मान्यता प्रदान की जाये।

  1. साइमन आयोग द्वारा निर्मित विधायिका पुनर्निर्माण की रूपरेखा के लाभ

को समझते हुए यह अधिवेशन यह राय व्यक्त करता है कि यह रूपरेखा

विधायिकाओं से ज्यादा राज्यसभा गठन के लिए उपयुक्त है। इस तथ्य

को ध्यान में रखते हुए तथा राज्यसभा के गठन को ज्यादा लोकतान्त्रिक

बनाने के दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए इस अधिवेशन का मत है कि

साइमन आयोग द्वारा विधायिकाओं के लिए सुझाई व्यवस्था को राज्य सभा

चयन के लिए लागू किया जाये तथा विधायिकाओं का गठन सीधे चुनाव

की व्यवस्था के आधार पर हो।

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  1. यह अधिवेशन भारत में सेना के बारे में साइमन आयोग द्वारा दी गई

सिफारिशों का अनुमोदन नहीं करता। हमारा यह मत है कि सेना का मामला

एक गम्भीर संरक्षित मामला है इसे भारत सरकार के कार्यकारी क्षेत्र से बाहर

नहीं किया जाना चाहिए।

  1. यह अधिवेशन दलित वर्ग के हितों के लिए एक अखिल भारत केन्द्रीय

संगठन के गठन की आवश्यकता में विश्वास व्यक्त करता है। इसलिए हम

एक समिति नियुक्त करते हैं जो : -

i ) ऐसी केन्द्रीय संस्था के संविधान की रूपरेखा तैयार कर इस अधिवेशन के

अगले सत्र में पेश करेगी।

ii ) दलित वर्ग से सम्बन्धित सभी विषयों तथा वर्तमान भारत के राजनीतिक

वातावरण में उठने वाले विषयों पर इस अधिवेशन की यह ‘‘कार्यकारिणी

समिति’’ कार्य करेगी। ख्1,

1 ‘‘बाम्बे क्रॉनिकल, 18 अगस्त, 1930