396 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
चीज हासिल की है तो वह है कुछ राजनीतिक अधिकार। यदि हम अनुसूचित जाति फेडरेशन के झंडे तले एकजुट होंगे, तो हम उन अधिकारों को प्राप्त कर सकते हैं और अपने समाज को अव्यवस्था से बाहर निकाल सकते हैं।
‘‘लेकिन हम एक शक्ति प्राप्त कर सकते हैं और वह है राजनीतिक शक्ति। यह शक्ति हमें हासिल करनी होगी। इस शक्ति से लैस होकर हम अपने लोगों के हितों की रक्षा कर सकते हैं।
‘क्या आपको भरोसा है कि इस देश की आजादी से आपको यह शक्ति मिल जाएगी।? हम कभी भी देश के स्वाधीन होने के खिलाफ नहीं थे, लेकिन हम एक सवाल का सीधा जबाव चाहते थे। आजाद भारत में हमारा भाग्य क्या होगा? मैंने गांधी जी और दूसरे कांग्रसी नेताओं के सामने भी यह सवाल उठाया था। केवल एक ही सवाल है कि स्वराज्य में हमारे लोगों की स्थिति क्या होगी? क्या हम आज की भांति वही भंगी और चमार बने रहेंगे? क्या हमारे बच्चे आज की तरह विद्यालयों में प्रवेश नहीं पा सकेंगे और हमारे लोग उसी प्रकार दुःख भोगते रहेंगे, जिस प्रकार गांवों में अब भोग रहे हैं। हमारे लोगों का कया होगा? गोलमेज सम्मेलन में यह सवाल दोबारा उठाया गया था कि हम स्वराज चाहते हैं अथवा नहीं? मैंने गांधी जी से पूछा था जिन्होंने इस प्रस्ताव की पहल की थी, कि वह भारत को स्वराज्य मिलने पर गरीब लोगों के लिए क्या करेंगे? क्या हमें वैसे रक्षोपाय दिये जाएंगे जो मेस्लिमों, सिखों, ईसाइयों और एंग्लो इण्डियन को दिये जाने के लिए प्रस्तावित है। लेकन जब 1932 मेंअनुसूचित जाति के लोगों को पृथक अधिकार दिये गये, तो गांधी जी ने तब तक आमरण अनशन शुरू कर दिया था जब तक अनुसूचित जातियों के पृथक निर्वाचन मंडल के इस उपबंध को निरसित नहीं कर दिया जाता। उस समय हमारे बीच एक समझौता हुआ। लेकिन आज जो कुछ हो रहा है वह उस समझौते से बिल्कुल भिन्न है। उस समय उन्होंने वायदा किया था कि कांग्रेस के टिकट पर कोई भी उम्मीदवार अनुसूचित जाति फेडरेशन के उम्मीदवारों के खिलाफ खड़ा नहीं किया जाएगा। हम आरक्षित स्थानों पर अपने लोगां को भेजना चाहते हैं, लेकिन कांग्रेस पार्टी इसमें हस्तक्षेप कर रही है। वे हमारी आरक्षित सीटों पर उन लोगों को खड़ा करने की कोशिश कर रही है जो मूर्ख हैं और स्वार्थी हैं, जो कांग्रेस के पिट्ठू होंगे। जब कोई ब्राह्मण या बनिया कांग्रेस का टिकट मांगता है तो उससे एक सवाल पूछा जाता है वे यह जानना चाहते हैं कि वह कितनी बार जेल गया है। मैं कांग्रेस से पूछना चाहता हूं कि वे यही प्रश्न अनुसूचित जाति के लोगों से क्यों नहीं पूछते, जो कांग्रेस का टिकट मांगते हैं? और वे केवल अनपढ़ तथा अनजान लोगों को क्यों चुनते है।
‘‘संसद में अनुसूचित जाति के 30 लोग हैं। मैं उनसे पूछता हूँ कि उन्होंने वहां क्या किया है? उन्होंने कोई सवाल नहीं पूछा, उन्होंने कोई संकल्प पेश नहीं