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किया। और उन्होंने संसद में विचारार्थ कोई विधेयक प्रस्तुत नहीं किया। यदि बाहर से कोई आये और देखे कि संसद के 30 सदस्यों ने कोई भी शिकायत पेश नहीं की है तो वह सोचेगा कि हमारे लोग ठीक-ठाक हैं और उन्हें किसी विशेष रियायत की जरूरत नहीं है। इसलिए हम अपने सच्चे प्रतिनिधियों को भेजना चाहते हैं जो शिकायतां के निवारण के लिए विधानसभाओं के सामने हमारी शिकायतें रखेंगे।
‘‘पहले चुनाव से ही हम कांग्रेस के खिलाफ लड़ रहे हैं, क्योंकि हमारे अधिकारों में अनावश्यक रूप से हस्तक्षेप कर रही है। कांग्रेस पार्टी के नेता पंडित नेहरू को देखिए, उन्होंने पिछले 20 सालों में दो हजार भाषण दिये हैं, लेकिन उन्होंने अनुसूचित जातियों की भलाई के बारे में एक बार भी नहीं बोला। इस बात से आप समझ सकते हैं कि पार्टी को हमारे लोगों से कितनी सहानुभूति हैं उनके नेता ही बहुत अधिक हठधर्मी हैं। पंडित नेहरू हमेशा मुस्लिमां की बात करते हैं। मैं नहीं चाहता, कि मुस्लिमों की अपेक्षा की जाए, लेकिन मैं चाहता हूँ कि मुस्लिम उस समुदाय की कीमत पर मौज न करे, जिसे और अधिक संरक्षण की जरूरत हैं। मैंने सुना है कि कुछ लोग पंडित नेहरू के पास गये थे और उनसे अनुरोध किया था कि अनुसूचित जातियों के लिए कुछ किया जाए, लेकिन पंडित नेहरू ने उन्हें बताया कि उनके लिए बहुत कुछ किया गया है और उन्हें अब किसी विशेष चीज की जरूरत नहीं है। बंटवारे के समय, जब पाकिस्तानी प्राधिकारीयों ने हमारे लोगां से पाकिस्तान में रहने के लिए कहा ताकि उन्हें गंदगी के काम खुद न करने पड़े, तो मैंने गरीब अनुसूचित जातियों की निकासी के लिए कुछ करने के लिए पंडित नेहरू से कहा था, लेकिन पंडित नेहरू ने कुछ नहीं किया। मैंने अपने लोगों को निकालने के लिए दो व्यक्ति पाकिस्तान भेजे थे और हमारी महार बटालियन भी गरीब अनुसूचित जातियों की रक्षा के लिए वहां भेजी गई थी। यदि कांग्रेस नेता को हमारे लोगों से इतनी-सी सहानुभूति है तो प्रश्न है यह कि कांग्रेस हमारे लिए क्या करेगी।
‘‘पंजाब विधानसभा में 120 सीटों में से अनुसूचित जातियों के लिए 21 सीटें आरक्षित थीं और संघीय संसद में तीन सीटें आरक्षित थी। मैं उन सब दलों से जो इन आरक्षित सीटों पर अपनी पसंद के उम्मीदवारों को खड़ा करना चाहते हैं और अनुसूचित जातियों के साथ सहानुभूति दिखाना चाहते हैं एक सवाल पूछना चाहता हूं कि वे क्यों आरक्षित सीटों पर ही उम्मीदवारों को खड़ा करते हैं और साधारण सीटों पर उन उम्मीदवारों को खडा़ क्यों नहीं करते? यदि वे निष्ठावान हैं तो उन्हें हमारे लोगों के लिए साधारण सीटें देनी चाहिए। ये सब पार्टियां हमसे वह सब छीन लेना चाहती हैं, जो कुछ हमने बड़ी कठिनाई के बाद हासिल किया है।