124. 27.10.1951 मैं उस चट्टान की भांति हूं, जो पिघलती नहीं, बल्कि नदियों की दिशा बदल देती है। - Page 419

398 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

‘‘मैं आप लोगों को एक बताना चाहता हूँ कि राजनीतिक शक्ति के बिना हम इस दुनिया में नहीं रह सकते। हमने प्रांतीय विधानसभाओं में और संघीय संसद में सीटों का आरक्षण तो प्राप्त कर लिया है, लेकिन यह केवल 10 वर्ष के लिए है और कोई नहीं कह सकता कि 10 साल के बाद क्या होगा। यदि हमारे सही प्रतिनिधि विधानसभाओं और संसद में नहीं भेजे जाएंगे तो हमारे सब प्रयास बेकार हो जाएंगे और यदि वे भेजे जाएंगे, तो कुछ न कुछ परिणाम अवश्य निकलेगा। अन्यथा शासन में और स्थानीय निकायों में हमारी कोई आवाज नहीं हो सकती।

‘‘अब भारत में राजनीति का परिदृश्य बदल गया है। पहले कांग्रेस स्वराज्य के लिए लड़ रही थी। इसलिए सब लोग उसमें शामिल हो गये। जिन लोगों ने कांग्रेस का विरोध किया, उन्हें राष्ट्रद्रोही माना गया, लेकिन अब हालात बदल गये हैं। पंजाब के राष्ट्र विरोधी कांग्रेसी पहलवानों को देखिए। एक समय था जब भार्गव और सच्चर भाइयों जैसे थे। उन्होंने एक दूसरे के साथ शांतिपूर्ण रहने का वायदा किया था, लेकिन अब वे सबसे बड़े दुश्मन हैं। पेपर फाइल करने की अंतिम तारीख 5 नवम्बर है और आज 27 अक्टूबर है, लेकिन कांग्रेसी उम्मीदवारों की सूची पंजाब से अभी तक नहीं भेजी गई है। ये दोनों लोग प्रधानमंत्री बनने को आतुर हैं। बिहार में भी यही हो रहा है। मैं यह देखकर चकित हूँ कि कांग्रेस, जो विभाजन के समय इतनी ताकतवर थी, थोड़े ही समय में इतनी कमजोर हो गई। आज गांधी टोपी वाला आदमी सज्जन नहीं समझा जाता, लोग कहते हैं कि सज्जन कांग्रेसी का होना नामुमकिन। अब कांग्रेस पुरानी पड़ गई है और वह दूसरों के साथ लड़ने में समर्थ नहीं है। यह अपनी स्वाभाविक मौत मर जाएगी।

‘‘यदि आप लोग अनुसूचित जाति फेडरेशन के लिए वोट देंगे, तो मैं आपको आश्वासन देता हूँ कि हमारे उम्मीदवार आगामी आम चुनाव में जीत कर आयेंगे। इसमें कोई संदेह नहीं है। केवल शर्त यह है कि आप हमारे सच्चे प्रतिनिधियों को वोट दें। मतदान के दिन सभी स्त्री-पुरुष काम से छुट्टी लेकर मतदान करने जाएं।

‘‘अनुसूचित जातियों के लिए सीटों का आरक्षण केवल 10 वर्ष के लिए है। मैं चाहता था कि यह आरक्षण तब तक रहे जब तक अस्पृश्यता है, लेकिन कांग्रेसी नेता स्वर्गीय बल्लभ भाई पटेल ने हमारा विरोध किया। इस प्रकार अन्य लोगों की भी, जो समिति में थे, सरदार बल्लभ भाई पटेल का पक्ष लेना पड़ा, क्योंकि वे लोग पटेल की पार्टी के थे। इसलिए हमें विधानसभाओं में अपने सही प्रतिनिधि भेजने की कोशिश करनी चाहिए, ताकि वे हमारे अधिकारों की रक्षा कर सके और 10 वर्षों के बाद भी आरक्षण प्राप्त करने की कोशिश कर सकें। जो लोग दूसरी पार्टियों से टिकट लेने की कोशिश कर रहे हैं वे यह भूल जाते हैं कि 10 वर्षों के बाद वे कहीं