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के नहीं रहेंगे। दूसरी कोई भी पार्टी उनसे यह नहीं कहेगी कि वे उनके टिकट पर खड़े हों। आज अन्य पार्टियां केवल हमारी वोटें पाने के लिए और हमारी सीटें हथियाने के लिए चिंतित है, न कि हमसे सहानुभूति रखने के लिए।
‘‘जब विभिन्न पार्टियों को भिन्न-भिन्न प्रतीक चिह्न देने का समय आया तो हमारी पार्टी अर्थात् अनुसूचित जाति फेडेरशन को भी एक अखिल भारतीय दल के रूप में माना गया। दूसरे दलों ने अपने लिए बैल, घोड़े, गधे आदि प्रस्तावित किये। आपकी सुविधा के लिए मैंने अपना प्रतीक ‘हाथी’ बनाया ताकि लोग हमारी पार्टी के उम्मीदवारों को पहचानने में कोई कठिनाई महसूस न करें। हाथी दूसरे जानवरों से भिन्न आसानी से पहचाना जा सकता है।
‘‘इस बार संचयी मतदान प्रणाली के स्थान पर वितरणीय प्रणाली शुरू की गई है। जहां आरक्षित सीटें हैं वहां उस निर्वाचन क्षेत्र के मतदाता दो वोट डाल सकते हैं एक उस उम्मीदवार को जो आरक्षित सीट पर खड़ा है और दूसरा जो साधारण सीट पर खड़ा है। लेकिन हम एक ही आदमी को वोट नहीं दे सकते। इसलिए हमें किसी पार्टी के साथ गठजोड़ करना होगा, जिसके मतदाता अपना दूसरा मत हमारे प़क्ष में डालेंगे। जिस पार्टी के साथ हम समझौता करेंगे उसे कुछ ही दिनों में घोषित कर दिया जायेगा। आप उसी पार्टी को वोट दें। उसके बदले वह पार्टी हमारे उम्मीदवारों का समर्थन करेगी। इस प्रकार हमारे उम्मीदवार कामयाब होंगे। हमारे पास मत संख्या बहुत ज्यादा नहीं है और साथ ही संयुक्त निर्वाचक मंडल है जिससे हमारी स्थिति और भी तकलीफदेह हो जाती है। इसलिए हमें किसी न किसी पार्टी के साथ गठजोड़ करना होगा।
‘‘अंत मैं, में आपको बताना चाहता हूँ कि केवल एक पार्टी है, जो अनुसूचित जातियां के लिए कुछ कर सकती है और वह है अनुसूचित जाति फेडरेशन। मैंने आपके लिए मकान बनाया है और उसे ठीक हालत में रखना आपका काम है। मैंने पौधा लगा दिया है। यदि आप उसे सींचेंगे तो आप उसका फल भोगेंगे और आप उसकी छाया का भी आनन्द ले सकेंगे। यदि ऐसा नहीं हुआ तो आपको धूप में बैठना होगा। हमारी जाति बर्बाद हो जायेगी। इसलिए प्रत्येक अनुसूचित जाति, अनुसूचित जाति फेडरेशन के ध्वज तले एकत्र होनी चाहिए और उसे और अधिक शक्तिशाली बनाना चाहिए। यदि हम एकजुट होंगे, तभी हम कुछ हासिल कर सकते हैं। एकजुट होकर खड़े रहेंगे और विभाजित होकर गिर पडे़ेंगे।