125. 28.10.1951 संसदीय लोकतंत्र के असफल होने से विद्रोह, अराजकता और साम्यवाद का जन्म होगा। - Page 422

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आवश्यक रूप से इस देश के विद्यार्थियों पर निर्भर होना चाहिए। विद्यार्थी समाज के बौद्धिक वर्ग हैं, और वे जनमत तैयार कर सकते हैं। इसलिए मुझे आपको, संसद सदस्यों को संबोधित करते हुए बहुत प्रसन्नता है। और मैं इस मौके के लिए वास्तव में आभारी हूँ।

‘‘जब आपके प्रधानाचार्य ने आपको संबोधित करने के लिए अनुरोध करते हुए मुझे पत्र लिखा तो मैंने कोई विषय विशेष इंगित नहीं किया था। उस विषय के बारे में भी मेरे मन में कुछ नहीं था। जिस पर मैं आज सुबह आपके सामने यहां बोलूंगा। लेकिन जैसा कि प्रायः होता है, पलक झपकते ही अचानक विषय मेरे सामने स्पष्ट हो गया और मैंने ‘संसदीय शासन’ विषय पर आपके सामने कुछ शब्द बोलने का फैसला किया है। मेरे पास समय बहुत कम है। इसलिए मैं आपको इस विषय का संक्षिप्त विवेचन ही दे पाऊंगा।

‘‘संविधान सभा में चर्चा के दौरान हमारे संविधान के स्वरूप के बारे में नाना प्रकार की संम्मतियां थीं। कुछ लोग ब्रिटिश प्रणाली चाहते थे, कुछ अमेरिकी प्रणाली। दूसरे लोग भी थे, जो इनमे से कोई भी शासन प्रणाली नहीं चाहते थे। लेकिन लंबी बहस के बाद सदस्यों की बहुत बड़ी संख्या इस निष्कर्ष पर पहुंची कि ब्रिटेन जैसी संसदीय शासन प्रणाली हमारे देश के लिए सर्वात्तम है।

‘‘ऐसे भी कुछ लोग हैं जो संसदीय शासन नहीं चाहते। साम्यवादी, रूसी प्रकार का शासन चाहते हैं। समाजवादी भी वर्तमान भारत के संविधान के खिलाफ हैं, वे इसके खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने घोषणा कर दी है कि यदि वे सत्ता में आए तो वे इसमें बदलाव लाएंगे। व्यक्तिगत तौर पर मैं संसदीय शासन प्रणाली से बहुत अधिक लगाव रखता हूँ। आइये हम यह समझ लें कि इसका क्या अर्थ है और हमें इसे संविधान में सुरक्षित रखना होगा।

‘‘संसदीय शासन का अर्थ क्या है? वाल्टर बेग हॉट की एक पुस्तक है-इंगलिश कांस्टिट्यूशन’। वास्तव में यह एक श्रेण्यग्रंथ है। बाद में लास्की और सांविधानिक शासन के अन्य आधिकारिक विद्वानों द्वारा इसे परिवर्धित किया गया। बेगहॉट ने संसदीय शासन की संकल्पना को एक वाक्य में रखा है। उनके अनुसार संसदीय शासन से विचार-विमर्श द्वारा शासन अभिप्रेत है, न कि लात घूंसों का शासन। ब्रिटिश शासन प्रणाली में आप हमेशा देखेंगे कि वे कोई फैसला लेते हुए बिरले ही लात-घूंसों का सहारा लेते हैं, फैसला हमेशा विचार-विमर्श के बाद लिया जाता है। ब्रिटिश संसद में कोई भी अवरोध पैदा नहीं करता। फ्रांसीसी राजनीति को देखिए, वहां फैसले ज्यादातर पहलवानी दिखाकर दूसरों को परास्त करके लिए जाते हैं। आप आप देखेंगे कि यह प्रणाली उस व्यवस्था में जन्मे लोगों क लिए