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‘‘हम जानते हैं कि संसदीय शासन से बेगहॉट का अभिप्राय क्या था। लेकिन आज उसकी परिभाषा निरर्थक है, बल्कि अपर्याप्त है। संसदीय शासन प्रणाली में तीन मुख्य बातें अंतर्निहित होती हैं।
‘संसदीय शासन का अर्थ है पैतृक शासन का निषेध कोई भी आदमी आनुवंशिक राजा होने का दावा नहीं कर सकता । जो कोई शासन करना चाहता है, वह समय-समय पर जनता द्वारा निर्वाचित होना चाहिए। उसे जनता का अनुमोदन प्राप्त करना चाहिए। संसदीय शासन प्रणाली में आनुवंशिक शासन को कोई मंजूरी प्राप्त नहीं है।
‘‘दूसरे लोगों के सार्वजनिक जीवन में लागू कोई कानून, कोई उपाय जनता द्वारा चुने गये प्रतिनिधियों की सलाह पर आधारित होना चाहिए। कोई भी आदमी इस प्राधिकार की परिकल्पना नहीं कर सकता कि वह सब कुछ जानता है, वह कानून बना सकता है और शासन चला सकता है। कानून संसद में जन प्रतिनिधियों द्वारा बनाए जाते हैं। वही लोग उन आदमियों को सलाह देते हैं, जिनके नाम से कानून उद्घोषित किया जाता है। राजतंत्र के शासन और लोकतंत्रीय शासन प्रणाली में यही अंतर है। राजतंत्र में, जनता के कार्य राजा के नाम से किये जाते हैं। और राजा के प्राधिकार से किये जाते हैं। लोकतंत्र में, जनता के कार्य राज्याध्यक्ष के नाम से किये जाते है। लेकिन कानून और कार्यपालक उपाय वे प्राधिकार होते हैं जिनसे शासन चलाया जाता है। राज्याध्यक्ष नामधारी प्रमुख होता है वह प्रतीक मात्र होता है, वह एक प्रतिष्ठापित मूर्ति होता है। उसकी पूजा की जा सकती है, लेकिन वह देश का शासन नहीं चला सकता। देश का शासन, उनके नाम से, निर्वाचित जन प्रतिनिधियों द्वारा चलाया जाता है।
‘‘तीसरे और अंतिम, संसदीय शासन प्रणाली का मतलब है कि एक निश्चित अवधि में उन लोगों को जो राज्याध्यक्ष को सलाह देना चाहते हैं, अपने लिए जनता का विश्वास प्राप्त करना चाहिए। ब्रिटेन में, पहले संसद के चुनाव हर 7 वर्ष में होते थे। चार्टिस्टों ने इसका विरोध किया। वे हर साल चुनाव चाहते थे। इस आंदोलन का उद्देश्य बहुत प्रशंसनीय था। वास्तव में यदि हर वर्ष चुनाव होते, तो यह जनता के हित में सर्वोत्तम होता। पर ऐसा संभव नहीं हुआ होता। लेकिन संसदीय चुनाव बहुत महंगा काम है। इसलिए एक समझौता हुआ और 5 वर्ष की अवधि ऐसी सही अवधि मानी गयी, जिसके बाद विधायक और मंत्री जनता के पास जाएं और उनका विश्वास पुनः प्राप्त करें।
‘‘यह भी काफी नहीं है। संसदीय शासन प्रणाली विचार-विमर्श द्वारा शासन से कहीं अधिक है। संसदीय शासन प्रणाली के दो स्तंभ हैं। ये वे स्तंभ हैं, जिन पर शासन तंत्र काम करता है। वे दो स्तंभ तंत्र हैं- 1. विपक्ष 2. निष्पक्ष और स्वच्छ चुनाव।