404 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
‘‘पिछले 20 या 30 वर्षों से हम एक ही राजनीतिक दल के अभ्यस्त थे। हम संसदीय लोकतंत्र के निष्पक्ष कार्यकरण के लिए विपक्ष की आवश्यकता और महत्ता को भूल से गये थे। हमें बराबर यही बताया गया है कि विपक्ष एक बुराई है। पुनः हम यह भूल रहे हैं कि हमें इतिहास से शिक्षा लेनी होगी। आप जानते हैं कि वेदों ओैर स्मृतियों की व्याख्या करने के लिए निबंधकार होते थे। वे पहले सवालों को एक पक्ष अर्थात पूर्व पक्ष का उल्लेख करके श्लोकों और सूत्रों पर अपनी टीकाएं देना शुरू करते थे। इसके बाद वे उसके उत्तर पक्ष की व्याख्या करते थे। ऐसा करके वे
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हमें यह बताना चाहते थे कि जो सवाल उठाया गया है वह कोई आसान नहीं है। वह ऐसा सवाल है जिस पर विवाद, चर्चा और संदेह है। इसके बाद वे तथाकथित अधिकरण देते थे। जिसमें वे दोनों पक्षों की आलोचना करते थे। अंततः वे सिद्धांत के रूप में अपने निजी फैसले देते थे। इससे हम यह देख सकते हैं कि हमारे सभी प्राचीन गुरू दो दलीय शासन प्रणाली में विश्वास रखते थे।
‘‘संसदीय लोकतंत्र में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि सवाल के दो पक्ष हैं तो जनता को दूसरा पक्ष भी जानना चाहिए। इस प्रकार एक सक्रिय विपक्ष आवश्यक है। विपक्ष निष्पक्ष राजनीतिक जीवन की कुंजी है। कोई भी लोकतेत्र उसके बिना नहीं चलाया जा सकता। संसदीय शासन प्रणाली के दो जन्मदाता देश, ब्रिटेन और कनाडा इस महत्वपूर्ण तथ्य को मानते हैं और दोनो देशों में विपक्ष के नेता को सरकार द्वारा वेतन दिया जाता है। वे विपक्ष को अनिवार्य चीज मानते हैं। इन देशों के लोग यह मानते हैं कि विपक्ष भी उतना ही जागरूक होना चाहिए, जितनी सरकार। सरकार तथ्यों के दबा सकती है, सरकार केवल एक तरफा प्रचार कर सकती है। इन दो देशों में जनता के पास इस स्थिति के विपरीत प्रावधान हैं।
‘‘अब सवाल यह उठता है कि सत्तारूढ़ पार्टी ऐसा विपक्ष बनाने की अनुमति देने के लिए इच्छुक है या नहीं। कांग्रेस कोई विपक्ष नहीं चाहती। कांग्रेस छुटपुट विचारों के लोगो को एक छतरी के नीचे लाने का प्रयास करती है। मैं आपसे पूछता हूँ कि क्या इस देश के राजनीतिक जीवन में एक वांछनीय प्रवृत्ति है?
‘‘निष्पक्ष और स्वच्छ चुनाव दूसरा स्तंभ है जिस पर संसदीय लोकतंत्र निर्भर करता है। समाज के एक वर्ग से दूसरे वर्ग को शांतिपूर्ण तरीके से और बिना किसी
खून खराबे के सत्ता हस्तांतरण के लिए निष्पक्ष और स्वच्छ चुनाव आवश्यक है। पुराने जमाने में, यदि राजा मर जाता था, तो महल में कम से कम एक हत्या जरूर होती थी। महल में क्रांति हुआ करती थी। और अपने देश की बागडोर संभालने के लिए नये राजा के सिंहासन पर बैठने से पहले हत्याएं होती थीं। भारत का यही इतिहास