406 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
‘‘यदि इस देश में संसदीय लोकतंत्र असफल रहता है और यह मेरे द्वारा बताए गये कारणों से निश्चित रूप से असफल होगा तो इसका मात्र एक परिणाम होगा, विद्रोह, अराजकता और साम्यावाद। यदि सत्तारूढ़ लोग यह नहीं सोचते कि लोग आनुवंशिक प्राधिकार सहन नहीं करेंगे, तो यह देश बर्बाद हो जाएगा। या तो साम्यवाद आएगा जिस प्रकार रूस व्यक्ति की स्वतंत्रता और स्वाधीनता को समाप्त करके हमारे देश पर प्रभुत्व कायम कर लेगा अथवा जनता का वह वर्ग, जो सत्तारूढ़ दल से असफल होने से असंतुष्ट होगा, विद्रोह करना शुरू कर देगा और अराजकता फैल जाएगी। सज्जनो मैं चाहता हूँ कि आप इन भावी निश्चित घअनाओं को ध्यान में रखें। यदि आप चाहत हैं कि संसदीय शासन प्रणाली और संसदीय लोकतंत्र इस देश में प्रचलित हो, यदि आप संतुष्ट हैं तो हमें विचार, बोलने और कार्रवाई की स्वतंत्रता से आश्वस्त किया जाएगा। यदि हमें अपनी स्वाधीनता को बचाकर रखना चाहिए, यदि हम व्यक्ति स्वतंत्रता के अंतर्निहित अधिकार को मानते हैं तो हमारे देश के प्रबुद्ध समाज के रूप में, आप छात्रों का यह कर्तव्य है कि आप इस संसदीय शासन प्रणाली को, उसके सही अर्थ में संजोए रखने के लिए और उस दिशा में कायम करने के लिए अपना भरसक प्रयास करें।‘‘
‘‘सज्जनो, मुझे बस यही कहना था। मैं इस भव्य सभा को संबोधित करने का अवसर देने के लिए आपका धन्यवाद करता हूँ।‘‘ ख्1,
1 लोक राज्य : डॉ. बाबा साहेब अम्बेडकर विशेषांक, 16 अप्रैल, 1981, पृष्ठ 45-48