126. 28.10.1951 यदि हमारे प्रतिनिधि नहीं चुने जाएंगे, तो स्वाधीनता एक ढोंग बन जाएगी। - Page 429

408 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

वे उस उद्देश्य को कैसे प्राप्त कर पाए। भारत में उनकी अपनी कोई सेना नहीं थी। अब तक यह कोई नहीं बता पाया है कि अंग्रेज अपनी निजी सेना के बिना, भारत के सभी राजाओं और महाराजाओं को अपने अधीन करने में कैसे समर्थ हुए? अंग्रेज लोग अनुसूचित जाति के लोगों की मदद से भारत के शासक बने। ये लोग अछूत कहलाते थे, ये अनपढ़ थे और सवर्ण हिंदू इनके साथ बहुत अपमानजनक व्यवहार करते थे। इन अछूतों के पास आजीविका के कोई साधन नहीं हैं। वे हमेशा इन सवर्ण लोगों की दया पर रहते थे। इस प्रकार ब्रिटिश सेना में शामिल होने और आजीविका कमाने के आलावा उनके पास कोई विकल्प नहीं था। मैं आप लोगों पर यह छाप छोड़ना नहीं चाहता कि जो कुछ हुआ वह ठीक था। लेकिन मैं कुछ दूसरी बात कहना चाहता हूँॅ। मैं इंगित करना चाहता हूँ कि उन लोगों ने भी जिनकी हमने भारत में राज स्थापित करने में मदद की थी, हमारे लोगों के साथ इस तरीके से व्यवहार किया। इन अंग्रेजों की खातिर सेना में हमारे लोगों ने अपने प्राण दिये। लेकिन बदले में उन्हें क्या मिला? फायदा किन्हें हुआ? इस तथ्य के बावजूद कि अनुसूचित जाति के लोगों ने अंग्रेजों की मदद की थी। ब्राह्मणों औेर अन्य सवर्ण लोगों ने इसका पूरा फायदा उठाया था। अंग्रेजों ने उनके बच्चों को शिक्षा दी और उन्हें हर प्रकार की वित्तीय सहायता दी जबकि हमारे लोगों का कोई ध्यान नहीं रखा गया। इसका परिणाम यह हुआ कि गरीब अनुसूचित जातियां की कीमत पर इन सवर्ण लागों का भला हुआ और ये अनुसूचित जाति के लोग पहले जैसे रहे। यही कारण है कि अब तक कोई संपन्न अनुसूचित जाति परिवार नहीं है, उनके बच्चे शिक्षित नहीं हैं और वे साधारणतया पिछड़े हैं। परिणामस्वरूप सेना, पुलिस और प्रशासन के अनेक भागों में महत्वपूर्ण पद फिलहाल इन सवर्ण लोगों के हाथ में है। अंग्रेजों को हमारे लोगों की भलाई के लिए कुछ करना चाहिए था, लेकिन उन्हांने हमारे लिए कुछ नहीं किया। 1857 में जब गदर हुआ था तो उसके क्या कारण थे? चूंकि अंग्रेजों ने हमारे लोगों के लिए कुछ नहीं किया था, इसलिए सेना में हमारे लोगों ने उनके खिलाफ विद्रोह कर दिया। जब गदर शांत हुआ और यह पाया गया कि सेना में हमारे लोगों ने अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह किया था तो उन्होंने आगे सेना मं हमारे लोगों का भर्ती करना बंद कर दिया। इसके बजाय उन्होंने हिंदुओं और राजपूतों को भर्ती करना बंद कर दिया। इसके बजाय हिंदुओं और राजपूतों की भर्ती किया। इस प्रकार हमारे लोगों की आय का मुख्य साधन भी बंद हो गया। 1947, जब अंग्रेज भारत छोड़कर गये, तो हमारी दशा वही रही जो अंग्रेजों के भारत आने से पहले में थी। भारतीयों को सत्ता सौंपने के समय अंग्रेजों ने संपूर्ण सत्ता उच्च वर्ग के लोगों को हस्तांतरित की। हमें कुछ नहीं मिला। हमें इन निर्दयी लोगों की दया पर छोड़ दिया गया।