126. 28.10.1951 यदि हमारे प्रतिनिधि नहीं चुने जाएंगे, तो स्वाधीनता एक ढोंग बन जाएगी। - Page 430

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‘‘इससे आप उस ढंग को भली प्रकार समझ सकते हैं जिस ढंग से दूसरों लोगों ने अनुसूचित जातियां के साथ बर्ताव किया। इसी कारण हम अब तक इतने पिछड़े रहे। अब मैं एक सवाल पूछता हूँ कि क्या आप अब भी पिछड़े रहना चाहते हैं और इन सवर्ण लोगों के हाथ में गुलाम बनकर काम करना चाहते हैं? जब आर्य भारत आये तब यह वर्ण व्यवस्था लागू हुई थी। लोगों को उनके जन्म के अनुसार समाज में स्थान दिया था कुछ लोग ब्राह्मण कहलाए कुछ क्षत्रिय, कुछ वैश्य, शूद्र और अछूत। इन वर्णों के अनुसार अछूत सबसे नीचे थे और समाज से पूरी तरह विच्छिन्न थे। सवर्ण हिंदू और अछूत के बीच संबंध पैर और जूते का संबंध था। जब हम अपने घर में घुसते हैं तो हम जूते बाहर छोड़ आते हैं। उसी प्रकार अछूतों को समाज से बाहर रखा जाता था और उन्हें कोई भी अधिकार नहीं दिया जाता। हमने शताब्दियों से सवर्ण हिंदुओं के इस व्यवहार को सहन किया है और हम आज भी सामाजिक दृष्टि से, आर्थिक दृष्टि से और राजनीतिक दृष्टि से कष्ट भोग रहे हैं।

‘‘अनेक वर्षों के संघर्ष के बाद हमने कुछ राजनीतिक अधिकार प्राप्त किये हैं जिन्हें भारतीय संविधान में भी समाविष्ट किया गया है। पूरे 20 वर्ष मैं महात्मा गांधी से लड़ता रहा। वह हमें कोई पृथक अधिकार देने के विचार के खिलाफ थे। उनका तर्क था कि यदि अछूतों को अलग अधिकार दिये गये तो वे कभी भी हिंदू समाज में शामिल नहीं हो पाएंगे। वे हमेशा हिंदुओं से अलग रहेंगे। गोलमेज सम्मेलन में भी महात्मा गांधी ने पृथक निर्वाचक मंडल की हमारी मांग का विरोध किया था। इतने वर्षों के संघर्ष के बाद हमने कुछ राजनीतिक शक्तियां प्राप्त की हैं। अब हम अपने प्रतिनिधियों को अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित सीटां पर राज्य विधानसभाओं और संघीय संसद में भेज सकते हैं।

‘‘ऐसी बहुत सी पार्टियां हैं जो इन अधिकारों को छीनने के लिए आतूर हैं। वे हमारे मत प्राप्त करने के लिए और अपने पिट्ठुओं को हमारे लोगों के लिए आरक्षित सीटों पर भेजने के लिए आतुर हैं। आप उनका मंतव्य भलीभांति समझ सकते हैं। वे चाहते हैं कि अनुसूचित जातियां वहीं रहे जहां वे हैं और सत्ता में न आएं ताकि जो नीच कर्म हमारे लोग कर रहे हैं, उसका नुकसान न हो। इसलिए आपको आगामी चुनाव में अपने मतों के बारे में सावधान रहना होगा। आप देखें कि केवल हमारे सच्चे प्रतिनिधि ही हमारे वोटों से चुने जाएं दूसरे नहीं। तभी आपके अधिकार जो संविधान में समाविष्ट किये गये हैं, सुरक्षित रह सकते हैं।

‘‘यदि हमारे सच्चे प्रतिनिधि राज्य विधानसभाओं और संघीय संसद में नहीं चुने जाते हैं तो हम स्वतंत्रता का उपभोग नहीं कर सकते। स्वाधीनता हमारे लोगों के लिए ढोंग बन जाएगी। यह स्वर्ण लोगों की स्वाधीनता हो जाएगी। हमारी नहीं।