410 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
किंतु यदि हमारे सच्चे प्रतिनिधि संसद में और राज्य विधानसभाओं में भेजे जाएं, तो हम अपने लक्ष्य के लिए लड़ सकते हैं तभी शिकायतें दूर करवा सकते हैं। तभी हमारे बच्चे उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं। तभी हमारी गरीबी दूर हो सकती है। और तभी हमें जीवन के सभी पहलुओं में बराबर हिस्सा दिया जाएगा। हालांकि भारतीय संविधान में अनुसूचित जाति के लोगों के लिए विशेषाधिकार दिये गये हैं, फिर भी अन्य पार्टियां, विशेषकर कांग्रेस अनावश्यक रूप से उनमें हस्तक्षेप कर रही है। वह चुनाव के लिए अपने पिट्ठुओं को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीटों पर खड़े कर रही है। इस प्रकार कांग्रेस के टिकट पर चुने गये लोग हमारे हितों की रक्षा कैसे कर सकते हैं, क्योंकि उन्हें तो अपने मालिक की इच्छाओं के अनुसार चलना होगा? वे हमारे लिए क्या कर सकते हैं?
‘‘मैं आपको उन लोगों के बारे में बताना चाहता हूँ जो अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित सीटों पर कांग्रेस के टिकट पर संसद में निर्वाचित हुए थे। उनकी संख्या लगभग 30 थी और वे पिछले 4 सालां से संसद में हैं। 30 में से एक भी सदस्य ने संसद में अनुसूचित जातियों की शिकायतों के बारे में एक भी सवाल नहीं उठाया। यदि संसद में सवाल पूछा गया, तो स्पीकर ने उसे इजाजत नहीं दी आर मामला वहीं खत्म हो गया। यदि स्पीकर उदार हुए और उनहोंंने सवाल पूछने की इजाजत दे दी तथा वह सवाल कार्य में शामिल कर लिया तो कांग्रेस का मुख्य सचेतक संबंधित सदस्य के पास जाकर उससे सवाल मुद्रित होने से पहले उसे वापस लेने के लिए कहेगा। संयोगवश, यदि सवाल मुद्रित हो गया है, तो मुख्य सचेतक संबंधित सदस्य से उस दिन के लिए बाहर जाने के लिए कहेगा जब उत्तर अपेक्षित है और इस प्रकार उठाये गये मसले पर संसद में कोई भी चर्चा नहीं होगी। क्योंकि स्वयं वह सदस्य ही वहां नहीं होगा। संसद में एक महीने तक बजट पर चर्चा होती है। उस समय कोई भी व्यक्ति बजट पर बोल सकता है और यह बता सकता है कि अमुक विशेषाधिकार उसके समुदाय या उसकी पार्टी के लिए उपबंधित किये जाने चाहिए। यह वह बता सकता है कि अनावश्यक परियोजनाओं पर इतना सारा खर्च हो रहा है, जबकि महत्वपूर्ण प्रस्तावों की अपेक्षा की गई है। इन चार सालों में मैंने एक भी सदस्य को कटौती प्रस्ताव लाते हुए नहीं देखा है। यह सब कांग्रेस पार्टी के अनुशासन (डंडे के डर) के कारण है। यदि सदस्य कोई संकल्प पेश करना चाहते हैं तो उन्हें इसे पेश करने से बहुत पहले मुख्य सचेतक की इजाजत लेनी होती है। इनमें से किसी भी सदस्य ने इन चार सालों में कोई विधेयक भी पेश नहीं किया। ये अछूत, भारतीय ईसाई, एंग्लो इंडियन आदि संविधान में दिये गये विशेषाधिकारों का प्रयोग कैसे कर सकते हैं। यदि उनके लिए आरक्षित सीटें कांग्रेस के टिकट के माध्यम से उनके शत्रुओं द्वारा कब्जा ली जाती हैं।