414 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
को इससे डरने की जरूरत नहीं है। चमार और भंगी सब बराबर हैं। इमें एकजुट रहना चाहिए और किसी को अपने आपको दूसरे से अलग नहीं सोचना चाहिए। मैं सभी स्त्री और पुरुषों से अनुरोध करना चाहता हूँ, कि वे मतदान के दिन हर चीज छोड़कर मतदान केंद्र जाएं और अपना वोट डालें। पहले ही हमारे वोट कम हैं और यदि मतदाता उस दिन अपना वोट नहीं डालते हैं, तो यह हमारे दिए अच्छा नहीं होगा। हमारा प्रतिनिधि नहीं आ पाएगा। मतदान का दिन अनुसूचित जातियों के लिए जीवन -मरण का दिन है।
‘‘प्रत्येक राजनीतिक दल को जो आगामी चुनाव में भाग ले रहा है, एक पार्टी प्रतीक आबंटित किया गया है। हमारे फेडरेशन का प्रतीक हाथी है। मैंने हाथी का चुनाव इसलिए किया है कि हमारे लोगों के मन में कोई भ्रांति न हो। कुछ पार्टियों ने बैल, घे, गधे अपने चुनाव चिह्न के रूप में चुने हैं लेकिन मैंने सबसे अलग हाथी का चुनाव किया है।
‘‘इस बार यहां संचयी मतदान प्रणाली नहीं होगी, ताकि हम अपने सारे मत अपनी पसंद के एक ही उम्मीदवार को डाल सकें। लेकिन यहां वितरणीय प्रणाली होगी। और हमें अपने मतों को विभिन्न उम्मीदवारों में विभाजित करना होगा। ऐसे निर्वाचन क्षेत्र में जहां कोई सीट अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित है, वहां लोगों को दो वोट मिलेंगे, एक साधारण सीट के लिए और दूसरा आरक्षित सीट के लिए। हम दोनों वोट अपनी पार्टी के उम्मीदवारों को नहीं डाल सकते जो आरक्षित सीट पर खड़ा है। हम उसके पक्ष में केवल एक वोट डाल सकते हैं, और दूसरा वोट हमें साधारण सीट पर खडे़ दूसरे पार्टी के उम्मीदवार को देना होगा। इसलिए हमें किसी पार्टी के साथ सहयोग करना होगा जो अपना दूसरा वोट हमारे उम्मीदवार को दें और हमारा दूसरा वोट बदले में प्राप्त करें। हमने अभी तक यह तय नहीं किया है कि हम किस पार्टी से हाथ मिलाएंगे। बहुत सी पार्टियों ने गठजोड़ के लिए हमसे निवेदन किया है लेकिन अभी तक कोई अंतिम रूप नहीं दिया गया है। बातचीत चल रही है। किसी पार्टी से हाथ मिलाने से पहले हमें अनेक बार सोचना होगा। लेकिन हमें किसी न किसी पार्टी के साथ तो हाथ मिलाना होगा।
‘‘ अंत में, मैं आप को यह बताना चाहता हूँ कि हजारों लोग पंजाब और उत्तर प्रदेश से तथा अन्य सुदूर स्थानों से अपनी शिकायतें मेरे सामने रखने के लिए दिल्ली आते हैं। कुछ लोगों की शिकायत है कि उन्हें जमींदारों द्वारा पीटा गया