126. 28.10.1951 यदि हमारे प्रतिनिधि नहीं चुने जाएंगे, तो स्वाधीनता एक ढोंग बन जाएगी। - Page 436

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है। जब उन्होंन संबंधित प्राधिकारियों से आवेदन किया तो फैसला उनके खिलाफ दिया गया क्योंकि सत्तारूढ़ लोग भी सवर्ण जातियों के हैं। इस प्रकार ऐसी अनेक शिकायतें हैं, लेकिन मेरे लिए अकेले उन सब से निपटना संभव नहीं है। बहुत से लोग निराश होकर अपने घर लौटते हैं। इसलिए मैंने दिल्ली में एक भवन बनाने का निश्चय किया है और वहां एक अधिवक्ता रखन का फैसला किया है। वह अधिवक्ता लोगों की शिकायतों की जांच करेगा। उन्हें यथोचित सलाह देगा। इस काम के लिए हमने पहले ही नई दिल्ली में एक भूखण्ड खरीद लिया है और उस भूखण्ड पर हम एक भवन बनाना चाहते हैं जो फेडरेशन का प्रधान कार्यालय होगा। वहां बाहर से आये लेगों का स्वागत किया जाएगा और उनकी शिकायतें सुनी जाएंगी। हमारे पास यह भवन बनाने के लिए पर्याप्त धन नहीं है। जबकि वह नितांत अनिवार्य है। इसलिए मेरा अनुरोध है कि आप सब अपने साधनों के अनुसार कुछ अंशदान अवश्य करें। इस प्रकार हम अपना प्रयोजन पूरा करने में कामयाब होंगे। बाबा तुलादास भवन के लिए धन संग्रह करने के लिए पूरे पंजाब का दौरा करेंगे। मैं एक बार पुनः आपसे अनुरोध करता हूँ कि इस महान लक्ष्य के लिए उदारतापूर्वक अंशदान करें।

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