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यह ठीक है कि कांग्रेस के पास प्रचार के इतने साधन उपलब्ध हैं कि कांग्रेस पार्टी के टिकट पर खड़े होने वाले हर उम्मीदवार के पास अपने प्रचार के लिए सौ से भी ज्यादा एजेंट इशारे पर चलने के खड़े होंगे। कांग्रेस के मुख्यालय में उनमें बहुत सारे सरकारी नौकरों की तरह काम कर रहे हैं। उनकी हर शाखा के लिए एक कार्यालय बना दिया है। यह सब धन के बल पर है। कांग्रेस भारत की सबसे समृद्ध पार्टी है। पैसे से वह जो चाहे कर सकती है। बिना धन के कोई पार्टी अपनी प्रचार नहीं कर सकती है और बिना किसी भरपूर प्रचार के कोई दूसरी पार्टी फल-फूल नहीं सकती। कांग्रेस ने प्रचार द्वारा जनमत को अपने पक्ष में इस कदर मोड़ लिया है कि अब इसकी आड़ में वह सब कुछ कर लेने का प्रयास कर रही है। कांग्रेस को सत्ता में आये हुए अब तक चार बरस हो चले हैं और आप सब भली भांति समझ सकते हैं कि कांग्रेस ने लोगों के लिए क्या किया है। न रोटी है, न कपड़ा है और न मकान। यदि इन चार सालों में कांग्रेस ये चीजें नहीं दे पाई तो कोई यह उम्मीद कैसे करें कि एक बार फिर सत्ता में आने के बाद यह लोगों के लिए काम आएगी? कांग्रेस राज में केवल तीन ही उद्योग फले-फूले हैं और वे हैं भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद तथा कालाबाजारी। आज भ्रष्टाचार तथा अन्य बुराइयां भारत में अंग्रेजी हुकूमत के समय की तुलना में और बढ़ गई है। हम लोग भूख से मर रहे हैं और अमीरों तथा गरीबों के बीच एक गहरी खाई बन चुकी है। अगर कांग्रेस इन विसंगतियों को पांच सालों में समाप्त नहीं कर सकी, तो भविष्य में कैसे कर लेगी? दिन-ब-दिन अमीर आदमी अमीर और गरीब आदमी गरीब होता जा रहा है। इस दिशा में कांग्रेस ने क्या किया है?
कांग्रेस सरकार भ्रष्ट सरकार है। कांग्रेसी मंत्री घूस लेते हैं। वे कालाबाजारी के माध्यम से पैसा प्राप्त करते हैं। वे भ्रष्ट है। और जब हमारे मंत्रीगण इतने पतित चरित्र के हैं तो आप अच्छी तरह समझ सकते हैं कि उनके अधीनस्थों का आचरण क्या होगा और तब पूंजीपतियों के अधीन श्रमिकों की क्या दशा होगी। मुझे उम्मीद थी कि हमारे वर्तमान प्रधानमंत्री इस संबंध में कुछ करेंगे और घूसखोरी, भ्रष्टाचार, कालाबाजारी आदि हमेशा के लिए समाप्त हो जाएंगे। लेकिन मुझे यह देखकर बेहद अफसोस हुआ कि नई दिल्ली में अखिल भारतीय कांग्रेस की आम सभा में पं0 नेहरू ने कहा कि चूंकि भ्रष्टाचार अन्य कई देशों में भी व्याप्त है। इसलिए अगर भारत में भी यह है तो हमें अधिक चिंता करें की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने तो यह भी कहा कि दूसरे देशों की तुलना में हमारे देश में भ्रष्टाचार का स्तर छोटा है। मुझे नहीं पता है कि जब प्रधानमंत्री यह कहकर भ्रष्टाचार को प्रोत्साहन दे रहे हैं तो इसका स्तर यहां छोटा है तो वे इस बुराई को समाप्त कैसे कर पाएंगे? मैं कहता