418 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
हूँ कि अगर यह छोटे स्तर पर है तो तब भी इसका उन्मूलन किया जाना चाहिए। इस दिशा में प्रधानमंत्री जी ने क्या किया है? यदि मंत्री और बड़े सरकारी अधिकारी भ्रष्ट हो तो क्या इन्हें चुप रहना चाहिए।
जो कुछ मैंने कहा है वह सिर्फ मेरे द्वारा की गयी आलोचना नहीं है, खुद कांग्रेसियों ने कांग्रेस के मंत्रियों की निंदा की है। जैसे कि मद्रास में श्री टी. प्रकाशम कुछ समय के लिए मुख्यमंत्री थे। जब उन्हें सरकार से निकाल दिया गया था और उनकी गद्दी पर श्री राजे विराजमान हुए, उनके विरूद्ध कुछ आरोप थे और जांच किये जाने पर पाया गया कि उन्हांने घूस इत्यादि से काफी धन कमा लिया था। उन्हांने हजारों लाइसेंस और परमिट जारी किये थे। ठीक यही मध्य प्रदेश में भी हो रहा है। बहुत से मंत्री हैं जिन्होंने घूसखोरी की है। लेकिन वे अभी तक इस काबिल सरकार के मंत्री बने हुए हैं। उनके विरुद्ध कार्रवाई करने की बात तो दूर, उन्हें और भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है जो लोग इन मंत्रियों पर आरोप लगाते हैं उन्हें जेल भेज दिया जाता है। पंजाब में क्या हो रहा है? श्रीमान सच्चर तथा डॉ. भार्गव एक दूसरे से लड़ रहे हैं। दोनो ही पंजाब में मुख्यमंत्री थे। दोनों ही अपने निर्दोष होने की बात कह रहे हैं। दोनो ने एक दूसरे के विरुद्ध जांच की मांग की है। इस तथ्य से कोई इनकार नहीं कर सकता है कि पंजाब में अपने कार्यकाल के दौरान दोनों ने घूसखोरी की है तथा कालाबाजारी को प्रश्रय दिया है। अब वे फिर से मुख्यमंत्री की जुगत में लगे हैं। आगामी चुनाव में कांग्रेस की टिकटों पर वे अपने
खेमे के इतने प्रत्याशियों को मैदान में उतारना चाहते हैं, जो उनके मुख्यमंत्री बनने के समर्थन करने के लिए पर्याप्त हों। पंजाब में पर्चा दाखिल करने की अंतिम तिथि 5 नवम्बर तक है लेकिन आज 29 अक्टूबर 1951 की तारीख तक आपसी मतभेद के कारण कोई अंतिम सूची नहीं बन पाई है, और मुझे लगता है कि कभी इस पर एकमत नहीं हो पाएंगे।
यदि किसी व्यक्ति ने सरकार के किसी मंत्री अथवा अधिकारी पर घूसखोरी का आरोप लगाया है, तो सरकार का यह कर्तव्य है कि जांच शुरू करे और दोषी को सजा दे। कोई भी यदि सरकार दर अपने मंत्रियों व वरिष्ठ पदाधिकारियों को इस कद घूसखोरी करने की अनुमति दे रही हो, तो उसका अस्तित्व शेष नहीं रह सकता है। अगर सरकार का हर मंत्री पैसा कमाने लगेगा, तो सरकार क्या करेगी? ब्रिटेन के हाउस ऑफ कामन्स के एक मंत्री पर घूसखोरी का आरोप लगा। इंग्लैण्ड के तत्कालीन प्रधानमंत्री मि. ऐटली ने तुरंत जांच का आदेश दिया। मामले की जांच करने के लिए एक आयोग गठित हुआ। अपनी रिपोर्ट में आयोग ने बताया कि