5. 8.8.1930 एक देश, एक संविधान एक और भाग्य की भावना से जुड़े लोग स्वाधीन होने का जोखिम उठाते हैं। - Page 44

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परस्पर विरोधी धार्मिक आस्थाओं तथा स्वार्थों में विभाजित हैं। प्रश्न यह पूछा जाता है कि इतनी विषमताओं से घिरे लोग एक स्वशासित समुदाय बनकर दायित्व का वहन कैसे कर सकते हैं? यह कटु सत्य जिन्हें कोई भी बुद्धिजीवी अनदेखा नहीं कर सकता, क्योंकि स्वशासन से इन तथ्यों का सीधा सम्बन्ध है। परन्तु इन कठोर तथ्यों को मानते हुए क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता है? महानुभावों इससे पहले कि आप अपनी राय व्यक्त करें मैं कुछ सामान्य कठोर तथ्यों पर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा। जो स्थिति कुछ देशां जैसे, लेटविया, रूमानिया, लिथूआनिया, यूगोस्लाविया, इस्टोनिया व चैकोस्लावाकिया में आज है पर विचार करें। यह सब नये राज्य हैं जो 1914 के महायुद्ध के बाद स्थापित हुए हैं। ध्यान रहे कि यह महायुद्ध दुनियाभर में स्वशासित राज्यों के स्थापित करने के स्पष्ट सिद्धान्त पर लड़ा गया था। यह सभी नये स्थापित देश स्वशासित, सर्वोच्च, स्वतंत्र तथा अपने आन्तरिक व विदेशी मामलों पर स्वतंत्र निर्णय लेने में सक्षम हैं। इन राज्यों की आन्तरिक सामाजिक स्थितियां क्या हैं? आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि वहां की स्थिति भारत से ज्यादा खराब नहीं तो भारत जितनी खराब है। लटविया में लट, रूसी, यहूदी व जर्मन के अतिरिक्त अन्य राष्ट्रीयता के लोग हैं। लिथुआनिया में लिथुआनिये, यहूदी, पोल व रूसीयों के अतिरिक्त अन्य अल्पसंख्यक जातियां पाई जाती हैं। यूगोस्लाविया में सर्ब, क्रोटस, स्लावंज, रूमानियन, हंगेरियन, अल्बानियनज और जर्मन के अतिरिक्त बहुत से दास लोग हैं। इस्टोनिया में इस्टोनियनज़, रूसी, जर्मन और अल्पसंख्यक हैं। चैकोस्लोवाकिया में चैकस्, जर्मन, मगयार, रूथिनियनज़ और अन्य लोग हैं। हंगरी में मगयार, जर्मन व स्लोवैक हैं। थोड़े -थोड़े लोगों के ये गुट अलग कुल व भाषाओं से बंट अपने-अपने हर राज्य में परस्पर विरोधी झगडालू देशों की भांति तैयार हैं। इन विषम विचार वालों को एकता की लड़ी पिरोने वाली धार्मिक एकता भी नहीं है। उनमें आप को चार या पांच प्रकार के कैथोलिक ईसाई मिल जाएंगे। यहां रोमन कैथोलिक, ग्रीक कैथोलिक व चैकोस्लोवक कैथोलिक हैं। इनके अतिरिक्त इवैंजकलिकलस, यहूदी, प्रोटेस्टैंटस व बहुत छोटी धर्म की प्रजातियां वहां पाई जाती हैं। इस पर थोड़ा विचार करें। क्या भारतीय समाज की स्थिति ज्यादा भय पैदा करने वाली है, इन देशों की विषमता से बढ़कर। मैं साहस से कह सकता हूं - नहीं। अगर आपको इस विषय पर निष्कपट व स्वतंत्र निर्णय लेना है तो ऊपर कथित तथ्यों का संज्ञान लेना ही होगा। सज्जनो इस तुलना के आधार पर