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हमारे लोगों के हित के लिए कहा सब कुछ गया है, किया कुछ भी नहीं गया। हम स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि हम भले ही बहुत अधिक दबे हुए हैं, और अगर यह दमन जारी रहा तो क्रांति को कोई नहीं टाल पाएगा। हमने सोचा कि हमारे हिन्दू भाई हमारे लोगों की भलाई के लिए कुछ करेगे, लेकिन हमारी सारी आशाओं के बदले हमें बेवकूफ बनाकर छोड़ दिया गया है। विधानसभाओं में अनुसूचित जातियों के लिए कुछ सीटें आरक्षित कर दी गयी हैं लेकिन हमारे वास्तविक प्रतिनिधियां को इन सीटों से चुनने नहीं दिया है। यह आरक्षण सिर्फ दस वर्षों के लिए है और उसके बाद क्या होगा, हम नहीं कह सकते हैं। क्या आपको लगता है कि दस वर्षों के बाद हम इतने साधन संपन्न हो जाएंगे कि समाज में उच्च जाति के लोगों की बराबरी कर सकें? क्या हमारे लोग इतने संपन्न हो जाएंगे कि हिंदुओं के साथ बराबरी की हैसियत से लड़ाई लड़ सकें? मैं सवर्ण जाति के लोगों को चेतावनी दे रहा हूं कि यदि हमारी स्थितियां आज की तरह ही बनी रहीं, तो हमें कोई दूसरा हथकंडा अपनाना पड़ेगा। इस तरह के जीवन से हम तंग आ चुके हैं और अब इसे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेंगे।
ब्राह्मण और बनिये, आजादी के लिए कभी शहीद नहीं हुए, फिर भी आज लाभ लेने वाले भाग्यशाली लोग वे ही हैं। मैं जानना चाहूंगा कि पिछले युद्ध में उनके कितने लोगों की जानें गयी हैं? उनके कितने लोग सेना में हैं? अगर भर्ती हो रही हो, तो हमारे लोग सेना में जाने वालों में सबसे पहले रहते हैं। वे अपना कर्तव्य वैसे ही करेंगे जैसे वे पहले से करते आ रहे हैं। गरीबों ने हमेशा ही अमीरों की सुरक्षा की है, फिर भी अमीरों को गरीबों से कोई सहानुभूति नहीं है। इसीलिए मैं सवर्ण जाति के इन लोगों को चेतावनी दे रहा हूं कि अगर इन पिछड़े वर्गों की बेहतरी के लिए कुछ नहीं किया गया, तो फिर क्रांति अवश्यम्भावी है।
पिछले 30 वर्षों से मैंने अपने समाज के लिए संघर्ष किया है। मेरा कोई स्वार्थ नहीं है। मुझे इस बात की कोई शिकायत नहीं रही कि मैं मंत्री नहीं हूं या फिर यह कि मुझे कोई महत्वपूर्ण पद दे दिया जाए। मैंने स्वयं से भी कभी कोई इच्छा नहीं की है। गांधी ने हमेशा मेरा विरोध किया। जब गांधी स्वराज की मांग कर रहे थे, तो मैंने उनसे कहा था कि मैं उनकी मांग से पूरी तरह सहमत हूं और निश्चित रूप से उनका समर्थन करूंगा लेकिन मैंने उनसे सिर्फ एक सवाल किया था कि उनके तथाकथित ‘स्वराज’ में अनुसूचित जातियां की स्थिति क्या होगी? क्या हमारे लोगों को अच्छा जीवन-स्तर दिया जाएगा? क्या वे शिक्षित हो पाएंगे? क्या स्वराज में हमारे लोगों का बिल्कुल उत्पीड़न नहीं होगा? अब जब भारत के लोग आजाद हैं, तो हमें इसमें क्या लाभ मिले हैं? अगर आज हम पिछड़े हुए हैं, तो उन सवर्ण लोगों के कारण हैं, जिन्होंने हमें समाज से दूर कर रखा है। उन्होंने