424 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
सीट पर खड़ा होगा तथा दूसरा मत हम उस पार्टी के उम्मीदवार को देंगे जो अपना दूसरा वोट हमारी पार्टी के उम्मीदवार को देगा। हमें अपना गठबंधन किस पार्टी के साथ करना है, यह हमने अभी तय नहीं किया हैं बातचीत चल रही है और कुछेक दिनों में यह तय हो जाएगा। लेकिन यह बात हमारे मस्तिष्क में बिल्कुल साफ रहनी चाहिए कि हम किसी भी कीमत पर कांग्रेस से हाथ नहीं मिलाएंगे। यह अब कमजोर हो गयी है, और उसके सदस्य आपस में ही लड़ रहे हैं। कांग्रेस अपनी स्वाभाविक मृत्यु को प्राप्त होगी।
अंत में मैं एक बार फिर से आपसे निवेदन करूंगा कि आप उसी उम्मीदवार को वोट दें जो अनुसूचित जाति फेडरेशन के टिकट पर चुनाव लड़ रहा हो। संघ के उम्मीदवार आपके वास्तविक प्रतिनिधि हैं, जो अपने समुदाय के हित के लिए सब कुछ करेंगे। वे स्वार्थी नहीं रहेंगे। वे मरते दम तक अपने समुदाय की सेवा करेंगे।
के हित के लिए सबकुछ करेंगे। वे स्वार्थी नहीं रहेंगे। वे मरते दम तक अपने समुदाया की सेवा करेंगे। हमें अपने भाई-बन्धुओं को बचाना चाहिए।
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7 नवम्बर, 1951 को डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्रों को संबोधित किया। अनुसूचित जाति फेडरेशन के नेता डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने ‘‘पिछड़ी जातियों की उपेक्षा’’ के विरुद्ध देश को चेतावनी दी और कहा कि ‘‘अगर वे समानता के स्तर तक उठने के अपने प्रयास में विफल कर दिए गए तो अनुसूचित जातियां साम्यवादी व्यवस्था का वरण कर सकती हैं, और तब भारत का भविष्य तहस-नहस हो जाएगा।’’
डॉ. अम्बेडकर ने कहा-‘‘यदि हम चाहते हैं कि इस तरह की कोई क्रांति न हो, तो राजनेताओं से मेरा प्रथम निवेदन होगा कि वे तत्काल इस समस्या को स्वीकार कर लें।’’ डॉ. अम्बेडकर ने क्षोभ व्यक्त किया और कहा कि यद्यपि संविधान ने भारत के सामाजिक और आर्थिक जीवन में ‘एक व्यक्ति एक वोट’ के सिद्धांत को मानते हुए व्यस्क मताधिकार की व्यवस्था को मान लिया है, पर उसे स्वीकार नहीं किया गया है। डॉ. अम्बेडकर ने कश्मीर की समस्या का हवाला देते हुए कहा कि कश्मीर एकल राज्य नहीं है। वह एक सामासिक राज्य है जिसमें हिन्दू, बौद्ध तथा मुस्लिम सभी हैं। जम्मू और लद्दाख गैर-मुस्लिम क्षेत्र हैं, जबकि कश्मीर घाटी मुस्लिम क्षेत्र है।
उन्होंने कहा ‘‘कश्मीरी लोग कैसे वोट करेंगे वह हम नहीं बता सकते।