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लेकिन भारत सम्पूर्ण जनमत-संग्रह के लिए संयुक्त राष्ट्र के प्रति कटिबद्ध है। अगर जनमत-संग्रह पाकिस्तान के पक्ष में जाता है, तो 20 प्रतिशत गैर-मुस्लिम आबादी का क्या होगा? यह प्रश्न बहुत महत्वपूर्ण है। अगर हम सभी कश्मीरियों को नहीं बचा सकते, तो कम से कम हमें अपने भाई-बुंधओं को बचाना चाहिए। यह समझौते का सीधा और स्पष्ट विश्लेषण है जिसको नकारा नहीं जा सकता।’’
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एक छात्र के प्रश्न का उत्तर देते हुए डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि भारत के भविष्य को लेकर उनमें गहरी निराशा है, क्योंकि विदेशी राष्ट्रों की नजर में भारत कोई महत्वपूर्ण राष्ट्र नहीं है और आंतरिक रूप से ब्रिटिश शासनकाल की तुलना में हमारे प्रशासन का पूरी तरह क्षरण हो चुका है। भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद हर जगह फैला हुआ है और कांग्रेस के ही मंत्रियों के विरूद्ध कोई जांच नहीं करवाई गई है, बल्कि वे तो उन्हें और भी सुरक्षा प्रदान कर रहे हैं।
डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि ब्रिटिश शासन में 15-20 वर्षां में एक बार अकाल पड़ा था, लेकिन आजकल हर साल अकाल पड़ता है। वे बोले, ‘‘इस देश की अर्थव्यवस्था को क्या हो गया है? क्या हम मक्खियों की भांति मरने वाले हैं?’’