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की ओर से डॉ. अम्बेडकर का माल्यार्पण किया गया।
डॉ. अम्बेडकर के पुराने सहयोगी श्री एस.के. बोले भी स्वागत करने वाले लोगों में एक थे। चूंकि श्री बोले के लिए अलग से बैठने की व्यवस्था नहीं की गई थी इसलिए जब डॉ. अम्बेडकर ने 85 वर्षीय श्री बोले को अपनी गोद में बैठने के लिए आमंत्रित किया तो सभा में आनंदमयी हास्य का वातावरण बन गया। इस हास्य के बीच में श्री बोले डॉ. अम्बेडकर की गोद में बैठ गए।
‘‘22 नवम्बर 1951 को करीब 6ः30 बजे शाम को मुंबई के भोईवाड़ा मैदान में अनुसूचित जाति फेडरेशन के तत्वाधान में डॉ. अम्बेडकर के लिए एक स्वागत समारोह आयोजित हुआ जिसकी अध्यक्षता श्री आर.सी. खरात ने की। लगभग 5,000 लोगों ने इसमें शिरकत की।
अध्यक्ष ने कहा कि बैठक का आयोजन डॉ. अम्बेडकर के स्वागत में अनुसूचित जाति फेडरेशन की मुंबई शाखा द्वारा किया गया है। उनके नेतृत्व में नीले झंडे तले एकत्रित होकर उन्होंने जबरदस्त एकता कायम कर ली है और अब तो दूसरे लोग भी नीले झंडे के पास जुटने लगे हैं। उन्होंने कहा कि डॉ. अम्बेडकर संसदीय चुनाव के लिए खड़े हुए हैं और अपने आम चुनाव के बारे में वे अनुदेश देंगे तथा यह भी कहा कि लोगों को उनके अनुदेशों पर अच्छी तरह से अमल करना चाहिए।
श्री जे.जी. भटनागर ने डॉ. अम्बेडकर तथा श्रीमती अम्बेडकर का माल्यार्पण कर स्वागत किया। उन्होंने बताया कि डॉ. अम्बेडकर को 25,000 रूपये जडि़त एक पर्स भेंट करने का निर्णय लिया गया था, लेकिन अभी तक वे उतनी राशि नहीं जुटा सके हैं। जो कुछ जुटाया गया है वह इन दो थैलों में रखा है और उम्मीद है कि शेष धनराशि शीघ्र ही जुटा ली जाएगी और चुनाव से पहले जल्द ही उनको भेंट कर दी जाएगी।
अपने स्वागत की प्रतिक्रिया में डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि बहुत-से लोग हैं जो उनसे दो सवाल कर रहे हैं, एक यह कि उन्होंने पहले इस्तीफा क्यों नहीं दिया? अगर वह पहले इस्तीफा दे देते तो कांग्रेस के विरुद्ध एक सशक्त मोर्चा बनाना मुमकिन हो जाता। दूसरा सवाल यह कि आखिर क्या वजह है कि पिछले चार सालों से वह कांग्रेस सरकार के मंत्रियों में से एक थे। वे मंत्रालय में इसलिए गए थे ताकि कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के घनिष्ठ सम्पर्क में रहकर वे यह जान सकें कि वास्तव में वे लोग हरिजनों की भलाई करने के इच्छुक हैं या नहीं, और उनका अनुभव कहता है कि कांग्रेस के लोग वास्तव में हरिजनों का हित करने की इच्छा नहीं रखते। उन्होंने कहा कि दस सालों के लिए उन लोगों को लोक सभाओं और विधानसभाओं में आरक्षित सीटें मिली हैं, लेकिन उन्हें कोई संदेह नहीं है कि भले ही कांग्रेस सरकार ने छुआछूत समाप्त करने के लिए कानून बनाए हैं, दस सालों बाद भी छुआछूत बरकरार रहेगा और उनकी स्थिति यथावत