129. 20.11.1951 मैंने इस्तीफा पहले क्यों नहीं दिया। - Page 449

428 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

बनी रहेगी। उन्होंने बताया कि संविधान में प्रावधान किया गया कि हरिजनों को सरकारी विभागों में 12.5 प्रतिशत नौकरियां दी जानी चाहिए, लेकिन श्री मुंशी तथा अन्य कांग्रेसी लोग इस रियायत पर समय की पाबंदी लगाना चाहते थे, लेकिन उनके विरोध के कारण वे सफल नहीं हुए। एक बार उन्होंने श्री राजगोपालाचारी से पूछा कि कितने प्रतिशत हरिजन सरकारी नौकरियों में हैं तथा उन्होंने विभिन्न विभागों को जारी किए गए परिपत्रों के माध्यम से जानकारी प्राप्त की कि किसी भी विभाग में हरिजनों को रोजगार प्राप्त नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि अंग्रेजों के समय वे वह (कार्यकारिणी परिषद) के सदस्य थे और वह श्रम तथा पी.बी.ओ. जैसे विभागों के इंचार्ज थे और ब्रिटिश सरकार ने विदेशी मुल्कों में हरिजनों की शिक्षा के लिए 3 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार राशि को खर्च तो कर रही है, लेकिन उसने हरिजनों को शिक्षा के लिए विदेशों में भेजना बंद कर दिया है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों के समय में फिटर इत्यादि की शिक्षा पाने के लिए कई हरिजनों को विदेशी मुल्कों में भेजा गया था। उन्होंने आगे कहा कि विभाजन के समय पाकिस्तानी सरकार ने हरिजनों को पाकिस्तान छोड़ने से रोक दिया और बहुतों का मुस्लिम समाज में धर्मांतरण कर दिया। महार बटालियन कुछ हरिजनों को भारत लाने में सफल हो गया। किंतु उन्हें भारत सरकार द्वारा किसी तरह की सहायता नहीं दी गई। कुछ ने राजघाट पर भूख हड़ताल की, लेकिन उनकी हड़ताल पर किसी ने ध्यान नहीं दिया और तब मजबूर होकर उन्हें (डॉ. अम्बेडकर को) उनको बताना पड़ा कि कांग्रेस सरकार उनकी समस्याआें का निस्तारण नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि चूंकि वह स्वयं हरिजनों का कोई हित नहीं कर पाए। उन्होंने त्यागपत्र देने का निर्णय लिया और जहां तक कांग्रेस सरकार पर उनके द्वारा लगाए आरोपों की बात थी, तो पंडित नेहरू ने कोई जवाब उन्हें नहीं दिया। उन्होंने कहा कि चूंकि आबादी में वे केवल 8 प्रतिशत हैं, वे किसी राजनीतिक दल की सहायता के बिना चुनाव नहीं लड़ सकते थे, और इसीलिए उन्होने सोशलिस्ट पार्टी से हाथ मिलाने का निर्णय किया। उन्होंने कहा कि अपनी विशेष समस्याओं के निवारण के लिए वे अपने संघ का अस्तित्व जारी रखेंगें। उन्होंने श्रोताओं से कहा कि जिस पार्टी से उन्होंने हाथ मिलाया है, चुनावों के दौरान ईमानदारी से उनका साथ दें। समता सैनिक दल की संतोषजनक कार्यपद्धति से उन्होंने अपना संतोष जाहिर किया और आशा व्यक्त की कि अगले आम चुनावों में वे बहुत उपयोगी साबित होंगे। उन्होंने कहा कि चार दिन बाद वह बंबई दौरे पर चले जाएंगे, और दुबारा उन लोगों के सामने उपस्थित होना संभव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि वे अपना वोट अनुसूचित जाति फेडरेशन तथा सोशलिस्ट पार्टी के उम्मीदवारों को दें और चुनावों के दिन कोई भी व्यक्ति घर न बैठा रहे।’’

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