135. 31.5.1952 देश का हित मेरे हृदय में सर्वोपरि है - Page 460

439

डॉ. अम्बेडकर की उपलब्धियों की प्रशंसा करते हुए डॉ. पौलुक्स ने इलस्ट्रेटेड वीकली ऑफ इंडिया दिनांक 15 जून, 1952 को लिखा।

e kp kj
e kp kj

‘‘चाहे सरकार में हो या उससे बाहर, डॉ. भीमराव अम्बेडकर हमेशा खबरों में बने रहते हैं। इस सप्ताह में इससे पहले राज्यसभा में दिये उस कठोर भाषण से एक बार वे सुर्खियों में रहे थे जब उन्होंने सरकार की कश्मीर नीति पर धावा बोला, जबकि उसके निर्माण के समय वह भी उस सरकार की इसी कैबिनेट का हिस्सा थे। यह खबर सुनकर निश्चित रूप से उन्होंने कुछ राहत की सांस ली होगी कि कथित खतरनाक डॉ. अम्बेडकर 1 जून को देश से बाहर अपनी पुरानी कोलंबिया यूनिवर्सिटी से एल.एल.डी. की मानद उपाधि प्राप्त करने के लिए वह वायुयान से न्यूयॉर्क जा रहे हैं।

यह उपाधि उन्हे तीन वर्ष पूर्व यूनिवर्सिटी के तत्कालीन अध्यक्ष जनरल आसेनहोवर के हाथों से मिल गई होती, लेकिन मंत्रिमंडल के दायित्वों तथा बाद में चुनाव की तैयारियों के कारण वह नहीं आ सके और यूनिवर्सिटी यह उपाधि अनुपस्थिति में नहीं देना चाहती थी।

डॉ. अम्बेडकर बीस साल बाद अमेरिका जा रहे हैं। पौलुक्स को बताया कि डॉ. अम्बेडकर यात्रा पर उनके साथ इसलिए नहीं आ रहे हैं, क्योंकि डॉलर की प्रचुर आपूर्ति नहीं हो सकी है। न्यूयॉर्क में रहते हुए उनकी योजना किसी अस्पताल में जाकर इलाज करवाने की है।

‘‘पौलुक्स द्वारा लिखित लेख का कॉलम 04 इलस्ट्रेटेड वीकली ऑफ इंडिया, 1-6-1952, पृष्ठ, 8 पर)

डॉ. अम्बेडकर को न्यूयॉर्क के लिए 1 जून, 1952 को रविवार की रात को निकलना था। उनके सम्मान में उनके मित्रों, शुभेच्छुओं, प्रशंसकों और पीपुल्स एजुकेशन सोसायटी के कर्मचारियां ने एक भव्य रात्रि भोज का आयोजन किया। यह आयोजन क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया के विज्ञान लॉन में उनके प्रस्थान के दिन पूर्व अर्थात् 31 मई, 1952 को आयोजित किया गया अगले दिन रविवार की रात में निकलना था। कई नामी-गिरामी व्यक्तित्व जैसे प्रधानाचार्य डॉ. वी.एम. पाटनकर, जो पीपुल्स एजुकेशन सोसायटी के सचिव हैं, श्री के.वी. चित्रे, श्री प्रभाकर श्री बी.एच. राव, श्री डब्ल्यू अल्फ्रेड जो पत्रकार संघ के अध्यक्ष हैं, अपनी महिमामयी उपस्थिति से अवसर को सुशोभित कर रहे थे। इस अवसर पर पाटनकर ने कहा कि बहुत-से