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इंग्लैंड का इतिहास ले लें। यह कोई नहीं कह सकता है कि 1688 की इंग्लैंड की क्रांति से पहले ब्रिटिश लोकतंत्र वही था जो 1688 की क्रांति के बाद आया। न तो कोई यह ही कह सकता है कि पहले सुधार विधेयक बिल के पारित होने के समय 1688 से 1832 के बीच में इंग्लैंड का जो लोकतंत्र अस्तित्व में था वह वही लोकतंत्र है जो 1832 के अधिनियम के पारित होने के बाद विकसित हुआ। लोकतंत्र का स्वरूप परिवर्तित होता रहता है।
तीसरी चीज जिस पर मैं आपका ध्यान आकृष्ट करना चाहूंगा वह ये है कि लोकतंत्र के केवल स्वरूप में ही बदलाव नहीं होता है। लोकतंत्र के उद्देश्य में भी बदलाव होते रहते हैं। आप प्राचीन अंग्रेजी लोकतंत्र का उदाहरण लें। उस लोकतंत्र का मकसद क्या था? इसका मकसद राजा पर अंकुश लगाना था। अब के हमारे कानून के शब्दों में कहें तो राजा को उसके विशेषाधिकारों का उपयोग करने से वंचित करना था। राजा ने तो यहां तक कह दिया था कि यद्यपि कानून बनाने वाली संस्था के तौर पर संसद अस्तित्व में रह सकती है, ‘‘राजा के रुप में मुझे यह विशेषाधिकार प्राप्त है कि मेरा कानून अंतिम माना जाएगा।’’ राजा की इस प्रकार की तानाशाही थी जिसने लोकतंत्र को अस्तित्व प्रदान किया।
अब लोकतंत्र का उद्देश्य क्या है? आधुनिक लोकतंत्र का उद्देश्य किसी तानाशाह राजा पर अंकुश लगाना नहीं है, बल्कि लोगों का कल्याण करना है। लोकतंत्र के उद्देश्य का यह अंतर अत्यंत विशिष्ट है। इसलिए आप लोग पाएंगे कि मैंने जो शीर्षक अपने विषय को दिया है उसमें जान-बूझकर, ‘‘आधुनिक लोकतंत्र की सफलता के लिए पूर्व शर्तों की आवश्यकता जैसे-शब्दों का प्रयोग किया है।
| y | ksd | r | a= |
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| d | h |
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अब मैं फिर पूछता हूं कि लोकतंत्र से हमारा क्या आशय है? मैं अपने विषय पर आंऊ उससे पहले हम साफ-साफ समझ लें। जैसा कि आप जानते हैं लोकतंत्र को बहुत-से लोगों ने, राजनीति विज्ञान के लेखकों, दार्शनिकों तथा समाजशास्त्रियों ने परिभाषित किया है। अपने विचार को समझाने के लिए मैं सिर्फ दो का उदाहरण लेता हूं। मुझे मालूम नहीं है कि आप में से कोई अंग्रेजी संविधान पर लिखी वाल्टर बेगहॉट की उस पुस्तक से परिचित है या नहीं जो लोकतंत्र की स्पष्ट तस्वीर देने का प्रथम आधुनिक प्रयास है। अगर आप वाल्टर बेगहॉट की उस पुस्तक का हवाला लें तो लोकतंत्र की परिभाष ‘‘विमर्श द्वारा चुनी हुई सरकार’’ है। दूसरा उदाहरण अब्राहम लिंकन का है। दक्षिणी राज्यों की जीत के बाद दिए गए अपने प्रसिद्ध गेटिसबर्ग भाषण में उन्होंने लोकतंत्र का लोगों की, लोगों के द्वारा और लोगों के लिए सरकार’