138 22.12.1952 लोकतंत्र को सफलतापूर्वक चलाने के लिए शर्तें - Page 474

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मतलब है कि जब एक पार्टी सत्ता में आ गयी तो उसने क्लर्कों और चपरासियों समेत उन सभी कर्मचारियों को हटा दिया जिनकी नियुक्ति उनके पूर्ववर्ती पार्टी द्वारा की गयी थी और उन्होंने उन पदां पर उन सज्जनों का नियुक्तकर लिया जिन्होंने उस पार्टी को सत्ता दिलान में मदद की थी। सच कहें तो काफी सालों तक संयुक्तराज्य में ऐसी कोई प्रशासनिक व्यवस्था नाम की चीज नहीं थी जिसके बारे में कुछ कहा जाए। बाद में उन्होंने खुद महसूस किया कि यह लोकतंत्र के नजरिए से उचित नहीं है। उन्होंने इस भ्रष्ट व्यवस्था को समाप्त कर दिया। प्रशासन को शुद्ध, निष्पक्ष तथा राजनीति और नीति से दूर बनाए रखने के लिए उन्होंने राजनीतिक कार्यालयों और सरकारी कार्यालयों के रूप में विभेद रखा है। सरकारी सेवा स्थायी है। यह सभी दलों को सेवा प्रदान करती है भले ही सत्ता में कोई हो और मंत्रियों की दखल के बिना प्रशासन चलाती है। ऐसी व्यवस्था अंग्रेजों के समय में हमारे यहां भी थी। भारत सरकार के सदस्य के रूप में अपने कार्यालय में मैंने खुद ऐसा एक अनुभव किया था जो मुझे अच्छी तरह याद है। शायद आप लोगों को याद हो कि दिल्ली में हर गली, हर क्लब का नाम किसी-न-किसी वायसराय के नाम पर पड़ा है। केवल एक ही गर्वनर जनरल जिनका नाम किसी गली या संस्था से नहीं जोड़ा गया था वह थो लॉर्ड लिन्लिथगो उनके निजी सचिव मेरे मित्र थे। उस समय बहुत सारी अन्य चीजों के साथ-साथ लोक निर्माण विभाग का भी प्रभाग मेरे पास था। वह आये और धीमे-से मुझसे बोले, प्रिय डॉक्टर साहब क्या आप कुछ ऐसा कर सकते हैं ताकि लॉर्ड लिन्लिथगो के नाम पर भी किसी संस्था या कार्य का नाम जुड़ जाए?’’

उन्होंने कहा कि यह बड़ा अस्वाभाविक है कि उनको छोड़कर और सबका नाम कहीं न कहीं है। मैंने कहा, ‘‘मैं विचार करूंगा।’’ उस समय मैं दिल्ली शहर को गर्मी के मौसम में पानी उपलब्ध कराने के लिए जमुना पर एक बांध बनाने के बारे में विचार कर रहा था, क्योंकि गर्मियों में जमुना सूख जाती है। मैंने प्रयास नामक अपने यूरोपीयन सचिव को बताया और कहा, ‘मि. प्रियास देखिये, गवर्नर जनरल के सचिव ने मुझसे कहा है। क्या आपको लगता है कि हम लोग कुछ कर सकते हैं?’’ आपको क्या लगता है कि उसने क्या जवाब दिया होगा? उसका जवाब था, ‘‘सर, हमें ऐसी कोई चीज बिल्कुल नहीं करनी चाहिए।’’ इस देश में किसी भी सूरत में ऐसी चीज होना बिल्कुल असंभव है। मेरी समझ में वहां किसी अधिकारी के लिए कोई ऐसी बात कह पाना, जो कि मंत्री की इच्छाओं के विरुद्ध हो, बिल्कुल असंभव है। लेकिन उन दिनों यह बिल्कुल संभव था, क्योंकि ब्रिटेन की तर्ज पर हमने भी यह बुद्धिमतापूर्ण निर्णय लिया हुआ था कि प्रशासन के कार्यों में सरकार की दखल नहीं होनी चाहिए, और सरकार का कार्य नीति निर्माण करना है तथा दखल करना और पक्षपात करना इसका काम नहीं है। यह बहुत आधारभूत आवश्यकता है और