454 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
मुझे डर है कि हम पहले ही उससे अलग हो चुके हैं और जिस चीज को हमने इतने दिनों तक साथ संजोया था हम उसे पूरी तरह नष्ट करके खो देंगे।
शर्त - 4
मेरी दृष्टि से लोकतंत्र के सफलतापूर्वक कार्य करने के लिए चौथी महत्वपूर्ण शर्त है संवैधानिक नैतिकता का पालन। बहुत-से लोग हैं जो संविधान को लेकर
खासे उत्साहित दिखते हैं। पर मुझे भय है कि मैं नहीं हूं। मैं उन लोगों का साथ करने के लिए बिल्कुल तैयार हूं जो संविधान को हर हालत में समाप्त करवाना चाहते हैं ताकि उसे फिर से बनाया जा सके। लेकिन हम यह भूल जाते हैं कि जो संविधान हमारे पास है, उसमें केवल विधिक प्रावधान है, वह केवल अस्थिपंजर है। उस अस्थिरपंजर का मांस संवैधानिक नैतिकता में मौजूद है। हालांकि इंग्लैंड में उसे संविधान की नीतियां कहा गया है जिसके नियमों का पालन करने के लिए लोगों का तत्पर होना बहुत जरूरी है। मैं चाहता हूं कि आप मुझे एक-दो उदाहरण रखने दें जो इस समय मुझे सूझ रहे हैं। आपको याद है जब 13 अमेरिकी उपनिवेशों ने विद्रोह कर दिया था, तब वाशिंगटन उनके नेता थे। अगर कहा जाए कि वह केवल एक नेता थे तो वास्तव में अमेरिकी जीवन में उनकी स्थिति को परिभाषित करने का यह बड़ा ही अपर्याप्त तरीका होगा। अमेरिका के लोगों के लिए वाशिंगटन ईश्वर थे। अगर आप उनका जीवन और इतिहास पढ़ें तो जानेंगे कि संविधान बनने के बाद उन्हें अमेरिका का पहला राष्ट्रपति बनाया गया था। जब उनका कार्यकाल समाप्त हो गया तब क्या हुआ? दुबारा खड़े होने से उन्होंने मना कर दिया। मेरे मन में तनिक भी संदेह नहीं है कि यदि वाशिंगटन लगातार दस बार राष्ट्रपति पद के लिए खड़े होते तो वे सर्वसम्मति से निर्विरोध चुन लिए जाते। लेकिन वे दूसरी बार नहीं खड़े हुए। जब उनसे इसका कारण पूछा गया, वे बोले, ‘‘मेरे लिए नागरिकों, आप वह मकसद भूल गए हैं जिनके लिए हमने यह संविधान बनाया गया था। हमने संविधान इसलिए बनाया था क्योंकि हम वंशानुगत राजशाही नहीं चाहते थे। अब अगर अंग्रेजी राजा को त्यागकर उसके प्रति निष्ठा को छोड़कर आप मेरे पास आयें और साल दर साल और एक कार्यकाल के बाद दूसरे कार्यकाल आप मेरी पूजा करते रहें तो आपके सिद्धांतों का क्या? अगर आप मुझे अंग्रेजी राजा की जगह स्थापित कर देते हैं तो क्या आप कह सकेंगे कि आपने उसके प्रति विद्रोह करके अच्छा किया?’’ उन्होंने कहा, ‘‘भले ही मेरे प्रति आपकी निष्ठा और समर्पण आपको यह कहने के लिए मजबूर कर रही है कि मुझे दूसरी बार के लिए खड़ा होना चाहिए, मैं आपकी भावनाओं का शिकार नहीं बन सकता हूं क्योंकि मैंने खुद उस सिद्धांत का जाप किया है कि हम वंशानुगत सत्ता नहीं रखेंगे।’’ अंततः उन लोगों ने उन्हें दूसरी बार खड़ा होने के लिए राजी