462 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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निपानी के बेलगॉम जिले के फेडरेशन की शाखा के सम्मेलन में दिनांक 25 दिसंबर, 1952 को डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने 50,000 लोगों की सभा को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘पिछड़ी जातियों के दुखों, भुखमरी एवं गरीबी के भयावह परिणाम सामने आएंगे।’’ उन्होंने फ्रांसीसी और रूसी क्रांतियों की याद दिलाई। उन्होंने सत्तारूढ़ दल को चेतावनी दी कि यदि अगले चुनावों तक पिछड़ी जातियों की दशाओं में सुधार नहीं हुए तो अनुसूचित जाति फेडरेशन कड़े कदम उठाएगा और परिणामतः सरकार गिर सकती है और व्यवस्था ध्वस्त हो सकती है। उन्होंने कहा, ‘‘मैं अपने लोगों की दुर्दशा के उन्मूलन के लिए दो साल और या हद से हद अगले चुनावों तक प्रतीक्षा करूंगा तथा अगर वार्ता से कोई नया समझौता सामने नहीं आता है तो उन्होंने श्री नेहरू द्वारा हाल ही में नागपुर में दिये गये उस बयान का खंडन किया कि भारत में छुआछूत बिल्कुल नहीं है।
चुनावी हार
अनुसूचित जाति फेडरेशन के उम्मीदवारों की चुनावों में हार संगठन की किसी कमी के कारण नहीं, बल्कि साथियों की कमी के कारण हुई थी। अगर कोई संगठन में कमी को सिद्ध कर दे तो वह राजनीति छोड़ देंगे। संघ के उम्मीदवारों को अनुसूचित जाति के लोगों से शत-प्रतिशत वोट मिले थे। इससे पूर्व फेडरेशन के महासचिव श्री पी.एन. राजभोज ने बैठक की अध्यक्षता करते हुए घोषणा की कि संघ की कार्यवाहक समिति फरवरी में दिल्ली में बैठक करेगी....पी. टी. आई. ख्1,
1 द नेशनल स्टैंडर्ड 27 दिसम्बर, 1952