151. 28.10.1954 मैं गौतम बुद्ध, कबीर, महात्मा फुले का भक्त हूं तथा ज्ञान, आत्म-सम्मान और चरित्र का पुजारी हूं - Page 498

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आत्म-सम्मान और चरित्र का पुजारी हूं

‘‘दिनांक 28 अक्तूबर, 1954 को करीब 6ः30 बजे नएगांव के पूरनदरे स्टेडियम में लगभग 25000 लोगों की उपस्थिति में एक जनसभा हुई जिसका आयोजन डॉ. अम्बेडकर हीरक जयंती समारोह समिति के तत्वाधान में किया गया। श्री आर. डी. भण्डारे ने इसकी अध्यक्षता की।

कोष के संग्रह का ब्यौरा देते हुए श्री शंकर अनन्त उपशाम ने बताया कि डॉ. अम्बेडकर ने 14 अप्रैल, 1952 को 60 वर्ष पूरे कर लिए थे, और समारोह 1952 में ही हो जाना चाहिए था, लेकिन वे उस तिथि को समारोह नहीं कर सके थे, इसलिए वे उस दिन समारोह मना रहे हैं। उन्होंने बताया कि अब तक 93,000 रुपये जुटा लिए गए और खर्चे निकलने के बाद 88,000 रुपये शेष रह जाएंगे। यह संग्रहण ग्रेटर बंबई के उनके समुदाय के लोगों से इक्ट्ठा किया गया था। उन्होंने आगे बताया कि बंबई के बाहर के लोगों ने भवन निर्माण के लिए लगभग 32000 रूपये जुटाये थे और उस राशि को ऊपर बतायी गयी राशि में जोड़कर कुल राशि एक लाख अठारह हजार रुपये डॉ. अम्बेडकर को दी जानी है।

अपने भाषण के दौरान अध्यक्ष ने कहा कि डॉ. अम्बेडकर व्यास, मनु, अब्रहम लिंकन और यहां तक कि कार्ल मार्क्स से भी महान व्यक्ति हैं। उन्होंने कहा कि भारत में कोई ऐसा नेता नहीं है जिसकी तुलना डॉ. अम्बेडकर से की जा सके। वास्तविक विभाजन होने से दस वर्ष पहले ही विभाजन के परिणामों की भविष्यवाणी कर दी गई थी। उन्होंने दलितों के उत्थान के लिए अपना पूरा जीवन न्यौछावर कर दिया था और एक लाख अठारह हजार रुपये की थैली उनको भेंट करते हुए वह लोगों की ओर से डॉ. अम्बेडकर से अनुरोध करते हैं कि इस राशि का उपयोग वे अपने उद्देश्यों के लिए करें। उन्होंने डॉ. अम्बेडकर को आश्वासन दिया कि उनकी इच्छा के अनुसार भवन निर्माण के लिए वे अलग से निधियां जुटा लेंगे।

उत्तर में डॉ. अम्बेडकर ने घोषणा की कि उनको दी गयी धनराशि का इस्तेमाल एक हॉल बनवाने के लिए किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस उद्देश्य के लिए जमीन पहले ही खरीदी जा चुकी है और जो लोग उस जमीन पर रह रहे हैं उनको वहां से हटाया जा रहा है। उन्होंने आगे यह भी कहा कि यह मान लिया