151. 28.10.1954 मैं गौतम बुद्ध, कबीर, महात्मा फुले का भक्त हूं तथा ज्ञान, आत्म-सम्मान और चरित्र का पुजारी हूं - Page 499

478 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

जाना कि वे शुरू से ही अत्यंत मेधावी छात्र रहे हैं, गलत होगा। वे अपने समुदाय के अन्य लड़कों की तरह ही साधारण थे। उन्होंने बताया कि उनके पिता ने उनका जन्मदिन का रिकॉर्ड सुरक्षित रखना जरूरी नहीं समझा था और उनके जन्म की ठीक-ठीक तिथि ज्ञात नहीं है। वह साठ से ज्यादा या साठ से कम हो सकती है। उन्होंने बताया कि यह सत्य है कि उनका जन्म आधी रात में 12 बजे हुआ था और उनके जन्म के समय उनकी मां को असहनीय प्रसूति पीड़ा हुई थी। उन्होंने आगे कहा कि उनका जन्म खराब नक्षत्र में हुआ था और जैसा कि ज्योतिषी ने बताया था उनकी मां शीघ्र ही परलोक सिधार जाएंगी। इस कारण से उनके भाई-बहन उनसे नफरत करते थे। उन्होंने कहा कि मां मृत्यु के बाद उनका पालन-पोषण उनकी चाची ने किया था। उन्होंने कहा कि बचपन के अपने दिनों में उन्होंने महाभारत, भगवद्गीता-जैसी धार्मिक पुस्तकों को अध्ययन किया था, लेकिन जब उन्हें गौतम बुद्ध के बारे में पुस्तक मिली तो इसका उनके मानस-पटल पर गहरा प्रभाव पड़ा और उसी समय से वह बुद्ध के अनुयायी बन गए। उन्होंने कहा कि हिंदुओं को भी अपने भले के लिए बौद्ध धर्म को अपनाना पड़ेगा। उन्होंने आगे कहा कि वह गौतम बुद्ध, कबीर, महात्मा फूले के भक्त तथा ज्ञान, आत्मसम्मान और चरित्र के पुजारी है। उन्हें कोई बुरी लत नहीं थी, लेकिन उन्हें पढ़ने का शौक था। उन्होंने कहा कि जीवन में उन्नति करने के लिए विद्या प्रत्येक व्यक्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने श्रोताओं से आग्रह किया कि वे इस बात को समझें कि अपनी आय का कुछ हिस्सा अपने समुदाय के लिए योगदान करना है और अपने फेडरेशन के लिए पूरे मनोयोग से कार्य कर सकें, क्योंकि अभी तक वे लक्ष्य से दूर हैं। वे अब लक्ष्य पाने की डगर पर हैं और उन्होंने जरा-सी भी सुस्ती दिखाई तो वे गिर जाएंगे। उन्होंने श्रोताओं से अपील की कि वे नेतृत्व पाने के लिए न लड़ें। उन्होंने कहा कि वह हमेशा समाज की सेवा करना चाहते थे, और जीवन पर्यन्त सरकारी सेवा से विरत रहे। अगर उन्होंने कोई सरकारी पद ले लिया होता तो अब तक वे पेंशनधारी हो गये होते। उन्होंने कहा कि 7-8 वर्ष से अधिक वह उन लोगों को मार्गदर्शन नहीं दे पाएंगे। उनके रहते ही उन लोगों को आकर उनका स्थान ग्रहण करना पड़ेगा। समारोह लगभग 8ः45 बजे समाप्त हो गया। लगभग 300 संगठनों और व्यक्तियों ने डॉ. अम्बेडकर और उनकी पत्नी का माल्यार्पण किया।’’ ख्1,

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1 पुलिस रिपार्ट : स्रोत सामग्री, खण्ड -1 पृष्ठ 421-422े