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धर्म का सारा लाभ उन्हें ही मिलना था। ब्राहा्रणों का धर्मान्तरण करने के अपने प्रयास में सैकड़ों साल बर्बाद करने के बाद भारत में ईसाई धर्म प्रचारकों को अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने अछूतों पर अपना ध्यान केंद्रित किया। और जब तक उन्होंने अछूतों की तरफ रुख किया, राष्ट्रवाद की भावना जोर पकड़ चुकी थी और ईसाइयत के साथ हर विदेशी चीज को देश के लिए शत्रुतापूर्ण माना जाने लगा। परिणाम यह हुआ कि ईसाई धर्म-प्रचारक बहुत थोड़े-से अछूतों का ही धर्म-परिवर्तन करवा पाये। मिशनरियों के 400 साल तक चलने वाले प्रयासों के बावजूद, यह बड़े आश्चर्य की बात है, भारत ईसाई आबादी बहुत छोटी है। अगर उन्होंने शुरूआत ही अछूतों और पिछड़ी जातियों से की होती तो वे उन सबका धर्मान्तरण कर चुके होते।
(5) रोम में ईसाइयत के प्रवेश पर ध्यान दिया जा सकता है। इससे काफी सीख मिलेगी। गिब्बन के ‘‘डिक्लाइन एण्ड फॉल द रोमन एम्पायर’’ के पन्नों में यह स्पष्ट किया गया है कि ईसाइयत का प्रवेश सबसे पहले रोम की जनता के उस वर्ग में हुआ जो गरीबी और घृणा के शिकार थे। गरीबों और पददलितों के धर्म के रूप में गिब्बन ने ईसाइयत का मजाक उड़ाया है। लेकिन गिब्बन की यह धारणा सरासर गलत थी। वह ये महसूस नहीं कर सके कि गरीबों को ही धर्म की जरूरत होती है। क्योंकि धर्म, यदि वह धर्म सच्चा हो, उन गरीबों को उद्धार की आशा प्रदान करता है जिनके पास और कुछ न होने की आशा प्रदान करता है, राहत प्रदान करने का जरिया बनता है। अमीरों के पास तो सब कुछ है। उन्हें आशा पर जीने की आवश्यकता नहीं है। वे अपनी भौतिक उपलब्धियों पर जीते हैं। दूसरी बात यह कि गिब्बन यह महसूस नहीं कर सके कि धर्म अगर सच्चा हो तो यह लोगों को उन्नत करता है, उन्हें श्रेयस्कर बनाता है। लोगों से धर्म पतित नहीं होता है।
(6) अब मैं उस शुरुआती पहल की बात करुंगा जो भारत में बुद्ध धर्म की वापसी के लिए की जानी चाहिए। मैं नीचे उनके बारे में उल्लेख करुंगा जो मुझे उचित लगती है :
( i ) बुद्ध के उपदेश तैयार करना जो कि धर्मान्तरण करने वाले का नियमित
साथी बन सकेगा। बुद्ध की शिक्षाओं को समाहित करने वाली किसी
उपदेश-पुस्तिका की कमी बुद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार में बड़ी बाधा है। पाली
में लिखे गये धार्मिक ग्रंथों के 73 खंडों को पढ़ने की उम्मीद आम लोगों
से नहीं की जा सकती है। ‘बाईबल’ नाम की छोटी पुस्तिका में ईशू मसीह
के संदेशों को समेटकर ईसाइयत बुद्ध धर्म की तुलना में काफी लाभप्रद
स्थिति में है। बुद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार के मार्ग की इस बाधा को समाप्त