152. 4.12.1954 भारत में बौद्ध आन्दोलन एक रूपरेखा - Page 505

484 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

तरफ भारत पर हुए मुस्लिम ब्राहा्रण ने विहारों को तहस-नहस करने और भिक्खुओं की हत्या करने में की गई हिंसा द्वारा इसे पूरी तरह नष्ट कर दिया।

(11) इस्लाम से बुद्ध धर्म को तो अब कोई खतरा नहीं है, लेकिन ब्राहा्रण से है। ब्राहा्रण बुद्ध धर्म का सबसे ताकतवर विरोधी होगा। ब्राहा्रण चाहे जो रंग धारण करे और चाहे जिस दल में रहे, वह रहेगा ब्राहा्रण ही। इसका कारण यह है कि ब्राहा्रण श्रेणीकृत सामाजिक असमानता को बनाये रखना चाहता है। क्योंकि इसी श्रेणीकृत असमानता ने ही ब्राह्मण को उठाकर सबस ऊपर आसीन कर दिया है। बुद्ध धर्म समानता में विश्वास करता है। यह उनकी प्रतिष्ठा और शक्ति की जड़ें ही

खोद डालता है। यह कारण है कि ब्राहा्रणों को इससे नफरत हैं बहुत संभव है कि यदि ब्राहा्रण को बुद्ध धर्म की पुनर्वापसी के आंदोलन का नेतृत्व करने दिया जाए तो वे अपनी शक्ति का प्रयोग इसे नष्ट करने या दिग्भ्रमित करने में लगा दें। इसलिए कम-से-कम हमारे आंदोलन के शुरुआती चरणों में उन्हें उनकी शक्तिशाली स्थितियों से बाहर करना बहुत जरूरी है।

(12) इस सारे प्रस्तावों के बाद धन का प्रश्न उठता है। यह प्रश्न भारत हल नहीं कर सकता है, ऐसा कहने में कोई संकोच नहीं होना चाहिए। केवल बौद्ध लोग ही हैं जो भारत में सहायता कर सकते हैं, लेकिन शुरुआती चरणों में उनकी संख्या बहुत कम होगी। इसलिए इसका बोझ भारत से बाहर के देशों द्वारा किया जाना चाहिए। इस उद्देश्य के लिए अपने दान को भारत में भेजकर मैं समझता हूं वे आसानी से ऐसा कर सकते हैं।

(हस्ता) भीमराव अम्बेडकर

kkj r
èk e
d h
LFk fr
,d Col2
fj iksV

ज्ञापन-2

  1. मैं भारतीय बौद्ध समुदायों की स्थिति स्वयं देखने के लिए दक्षिण भारत

में प्रवास पर गया जहां मैं 7 से 14 जुलाई तक रहा।

  1. मैंने पाया कि वहां निम्नलिखित स्थानों पर बौद्ध समुदाय मौजूद हैंः

  2. मद्रास शहर के पास दो केंद्र हैं :

( i ) पेरम्बर तथा

( ii ) कांचीपुरम (चिंगेपुत)