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(ब) मद्रास शहर के भीतर :
( i ) पालिकोण्डा (उत्तरी आरकॉट जिले में)
( ii ) त्रिपुरम (उत्तरी आरकॉट जिले में)
( iii ) बेल्लातूर (बेल्लूर जिले में) तथा
( iv ) वाणीवेद (बानीपेट में)
(स) मैसूर राज्य में
( i ) कोलार गोल्ड फील्ड
( ii ) प्रार टाउन, कैन्टोनमेंट, बंगलौर सिटी और
( iii ) बंगलौर सिटी में सेंट्रल जेल के पास
दक्षिण भारत में बुद्ध धर्म के ये केंद्र लगभग 30-40 वर्षों से अस्तित्व में हैं। इससे पता चलता है कि ब्राहा्रणों और हिंदुओं से घिरे रहने के बावजूद वे कितनी मजबूती से बुद्ध धर्म से लगातार जुड़े हुए हैं।
अपने ही संसाधनां से जो विहार उन्होंने बनाये हैं वे बड़ी दयनीय संरचनाएं मात्र हैं। अगर उनके विहारों के जीर्णोद्धार, पुर्निर्माण तथा सौन्दर्यीकरण के लिए उनकी कुछ मदद की जा सके, तो इससे काफी हौंसला बढ़ेगा।
मैंने 8 जुलाई को मैसूर राज्य के राज्य प्रमुख, महाराज से मुलाकात की और बंगलौर में अपने कार्य हेतु एक केंद्र खोलने के लिए उनसे अनुरोध किया कि वे बंगलौर स्थित अपनी निजी संपत्ति में से जमीन का एक टुकड़ा हमें दे दें। महाराजा ने सहर्ष ही 5 एकड़ जमीन दान कर दी। माननीय महाराजा के निजी सचिव से प्राप्त पत्र की एक प्रति मैंने इसके साथ संलग्न कर दी है। कृपया इस मामले को अभी गोपनीय ही रखें। उपहार-नामा (गिफ्टडीड) बनाया जाना अभी शेष है।
यह भूखंड बहुत सुंदर है और अत्यंत मनोरम स्थान पर स्थित है। यह काफी कीमती भी है। मैंने विचार बनाया है कि इस जगह का इस्तेमाल हमारे उपदेशकों एवं भिक्षुओं की दीक्षा के लिए एक बौद्ध धार्मिक प्रशिक्षण केंद्र के लिए एक केंद्र का निर्माण करने के लिए हो।
(हस्ता) भीमराव अम्बेडकर