153. 25.12.1954 बुद्ध ही पाण्डुरंग थे - Page 507

486 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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बुद्ध ही पाण्डुरंग थे

25 दिसंबर, 1954 को पूना के निकट देहू रोड पर बुद्ध की एक नयी प्रतिमा का अनावरण करने के दौरान डॉ. अम्बेडकर ने अपने श्रोताओं को बताया कि पंढरपुर में भगवान विनोबा की तो प्रतिमा है वह दरअसल बुद्ध की ही प्रतिमा है। उन्होंने आगे कहा कि भगवान पाण्डुरंग के नाम की व्युत्पति पुण्डलिक से हुई है। पुण्डलिक का अर्थ है कमल और कमल को पालि में पाण्डुरंग कहते हैं। इसलिए बुद्ध ही पाण्डुरंग थे। डॉ. अम्बेडकर के अनुसार बुद्ध धर्म को नष्ट करने के लिए ब्राहमणों ने कई अन्य देवी-देवताओं की स्थापना कर दी थी जिनकी पूजा आमजनों द्वारा की जाने लगी, क्योंकि आमजन का दृष्टिकोण अस्थिर था, और इसलिए बुद्ध धर्म का लोप हो गया। ख्1,

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1 लगभग 4000 लोगों ने कार्यक्रम में भाग लिया सोर्स मेटीरियल, वा. 1 पज 423 कुबेर, अम्बेडकर, ए क्रिटिकल स्टडी