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अलग-अलग दिये गए हैं उनमें अंतर है
महाबोधि सोसायटी ऑफ इंडिया, नई दिल्ली के तत्वाधान में 5 फरवरी, 1956 को बुद्ध विहार में आयोजित एक सभा में डॉ. भीमराव अम्बेडकर द्वारा दिये गए भाषण का सारांश।
कोई भी धर्म जो साम्यवाद का विकल्प नहीं प्रस्तुत करेगा बचा नहीं रह पाएगा। मेरी समझ से बौद्ध धर्म ही एकमात्र धर्म है जो साम्यवाद के रूप में कार्य कर सकता है।
मैं उन लोगों से सहमत नहीं हूं जो हर पंथ में विश्वास करते हैं और हर जगह से थोड़ा-बहुत ग्रहण कर लेते हैं। भारत में इस तरह का दृष्टिकोण देखा जाता है। व्यक्ति को अपना चुनाव खुद करना चाहिए और फिर उस चयन के साथ जुड़ा रहना चाहिए।
एक धर्म दूसरे से अलग हो सकता है। बौद्ध धर्म और जैन धर्म में अंहिसा के जो उपदेश अलग-अलग दिये गये हैं उनमें अंतर है। जैन धर्म में अंहिसा एकदम उत्कर्ष पर ला दी गई है।
पुनर्जन्म में मेरा पूरा विश्वास है। मैं वैज्ञानिकों के लिए यह सिद्ध कर सकता हूं कि पुनर्जन्म तर्कसंगत है। मेरे जरिये में, मनुष्य नहीं बदला है, पदार्थ या तल बदल गये हैं।