488 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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मुझे बुद्ध धर्म क्यों प्रिय है
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मुझे दिये गये थोड़े-से समय में मुझसे दो सवालों का जवाब देने के लिए कहा गया है। पहला सवाल है कि ‘‘मुझे बौद्ध धर्म क्यों प्रिय है?’’ और दूसरा ये है कि ‘‘मौजूदा परिस्थितियों में यह संसार के लिए कितना उपयोगी है?’’
मुझे बौद्ध धर्म बेहतर लगता है, क्योंकि यह समन्वित रूप से तीन सिद्धांत देता है जैसा कि कोई अन्य धर्म नहीं देता। अन्य सभी धर्म ईश्वर, आत्मा और मृत्यु के बाद जीवन इत्यादि प्रश्नों से परेशान है। बौद्ध धर्म प्रज्ञा (अंधविश्वास एवं प्राकृतिवाद के उलट समझ एवं बुद्धि) का उपदेश देता है। यह करूणा का पठ पढ़ाता है। यह समता (समानता) की शिक्षा देता है। पृथ्वी पर अच्छे एवं खुशहाल जीवन के लिए मनुष्य इन्हीं चीजों को पाना चाहता है। बौद्ध धर्म के यही तीन सिद्धांत मुझे आकर्षित करते हैं। यही तीन सिद्धांत दुनिया का भी आकर्षण होने चाहिए। ईश्वर या आत्मा समाज को नहीं बचा सकते हैं।
एक तीसरी बात भी है जिसे दुनिया को, खासतौर पर इसके दक्षिणी एशियाई हिस्से को अपनी तरफ आकर्षित करना चाहिए। दुनिया को कार्ल मार्क्स और साम्यवाद जिनके वे जनक बनाए गए हैं, का समाना करने की नौबत आ गयी है। यह बड़ी गंभीर चुनौती है। क्योंकि मार्क्सवाद और साम्यवाद धर्मनिरपेक्षता से संबंधित मसले हैं। उन्होंने सभी देशों के धर्मों की नींवे हिलाकर रख दी हैं।
मैं दक्षिण पूर्व एशिया के देशों में बुद्ध धर्म के लोगों का रूझान साम्यवाद की ओर होता देखकर बहुत अचंभित हूं। इसका मतलब है कि वे लोग यह नहीं समझते हैं कि बौद्ध धर्म है क्या मेरा दावा है कि बौद्ध धर्म मार्क्स और उनके साम्यवाद का पूर्ण जबाव है।
रूसी प्रकार का साम्यवाद एक रक्त रंजित के द्वारा साम्यवाद लाना चाहता है। बौद्ध धर्म का साम्यवाद रक्त रहित मानसिक क्रांति द्वारा साम्यवाद लाना चाहता है। जो लोग साम्यवाद को अपनाने के लिए आतुर हैं वे ध्यान रखें कि संघ एक साम्यवादी संगठन है। यहां कोई निजी सम्पत्ति नहीं है। ऐसा किसी हिंसा द्वारा नहीं किया गया है। यह सिर्फ विचारों के बदलाव द्वारा लाया गया है और फिर भी 2500 सालों से चलता आ रहा है। हो सकता है कि उसमें कुछ गिरावट आयी हो,