155. 12.5.1956 मुझे बुद्ध धर्म क्यों प्रिय है - Page 510

489

लेकिन यह विचार अभी भी बहुत ओजस्वी है। रूसी साम्यवाद के इस प्रश्न का उत्तर देना ही होगा। इसके अलावा उन्हें दो और प्रश्नों का उत्तर देना होगा पहला यह कि साम्यवादी व्यवस्था की जरूरत हमेशा के लिए क्यों है? यह माना जाना चाहिए कि उन लोगों ने ऐसा काम कर दिया है जो कि रूस के लोग कभी न कर पाते। लेकिन जब काम पूरा हो गया है तो जैसा कि बुद्ध ने उपदेश दिया है लोगों को स्वतंत्रता के साथ-साथ प्रेम क्यों न मिले। इसलिए दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के रूसी जाल में कूदने से सचेत रहना चाहिए। इसमें से वे कभी नहीं निकल पाएंगे। उनके लिए जरूरी सिर्फ इतना है कि वे बुद्ध और उनकी उन शिक्षाओं का अध्ययन करें जिन्हें उन्होंने उचित बताया है और उनकी शिक्षाओं को राजनीतिक रूप प्रदान करें। गरीबी तो है और हमेशा ही रहेगी। रूस में भी तो गरीबी है, लेकिन गरीबी मनुष्य की स्वतंत्रता की बलि चढ़ाने का बहाना नहीं हो सकती है।

दुर्भाग्य से बुद्ध की शिक्षाओं की सही व्याख्या कर उनको नहीं समझा गया है इस तथ्य को पूरी तरह से गलत तरीके से समझा गया है कि उनका उपदेश शिक्षाओं और सामाजिक सुधारों का संग्रह है। एक बार यह समझ लिया गया कि बुद्ध धर्म सामाजिक उपदेश है तो बुद्ध धर्म का पुनरोदय दुनिया के लिए शाश्वत घटना होगी और तब पूरी दुनिया समझ जाएगी कि बुद्ध धर्म सबको इतना आकर्षित क्यों करता है।

(हस्ता) भीमराव अम्बेडकर

26, अलीपुर रोड

नई दिल्ली,

दिनांक : 12 मई, 1956

बी.सी. लंदन

द्वारा प्रसारित भाषण,

12 मई, 1956

  