156. 24.5.1956 भारत में बुद्ध धर्म की लहर कभी कमजोर नहीं होगी - Page 512

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उन्होंने अपने अनुयायियों को बताया कि बौद्ध धर्म पर उनकी पुस्तक जल्दी की प्रकाशित होगी। बौद्ध धर्म के संगठन के सभी सुराखों को उन्होंने बंद कर दिया है और अब वे इसे प्रकाशित करके रहेंगे। साम्यवादियों को बौद्ध धर्म का अध्ययन करना चाहिए, ताकि वे जान सकें कि मानवता की बुराइयों को कैसे समाप्त किया जाए।

अपने भाषण के दौरान डॉ. अम्बेडकर ने अपनी तुलना मोजेज से की जिन्होंने अपने लोगों को मिस्र से स्वतंत्रता की धरती फिलीस्तीन पहुंचाया। उनके अनुसार किसी धर्म के पतन के तीन कारण होते हैं। उस धर्म में बाध्यकारी सिद्धांतों का अभाव बहुमुखी प्रतिभा एवं मन जीतने वाले वाचकों की कमी और आसानी से समझ आने वाले सिद्धांतों का अभाव।

उन्होंने यह घोषण भी की कि वह बुद्ध का एक विशाल मंदिर बनवाने वाले हैं।

बंबई में इस प्रकार उनके अंतिम भाषण की समाप्ति हुई। ख्2,

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2 कीर, पृष्ठ 492-93