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विसंगतियों का अस्तित्व ही लोकतंत्र के असफल होने का एक कारण है। शर्त-2
दूसरी चीज जो किसी लोकतंत्र के सफलतापूर्वक कार्य करने के लिए आवश्यक है, वह है ‘विरोध का अस्तित्व’। मैंने न केवल इस देश में वरन इंग्लैंड में भी देखा है कि लोग दलीय व्यवस्था की भर्त्सना करते हैं। यहां आने से ठीक पहले अभी मैं हन्सर्ड सोसायटी द्वारा प्रकाशित एक छोटी-सी पुस्तक पढ़ रहा था जो इंग्लैंड की दलीय व्यवस्था पर लिखी गई थी। और इस पुस्तक में पूरा एक अध्याय ही इस प्रश्न को समर्पित किया गा था कि क्या दलीय व्यवस्था अच्छी व्यवस्था है और इसे चलने देना चाहिए। कई तरह के दृष्टिकोण हैं। लेकिन मुझे पता है कि वे सारे लोग जो दलीय व्यवस्था का विरोध करते हैं और इसलिए जिन्हें ‘विपक्ष’ का भी विरोधी माना जा सकता है, वे लोकतंत्र क्या है यह पूरी तरह से नहीं समझ पाते प्रतीत होते हैं। लोकतंत्र का अर्थ क्या है? मैं इसको परिभाषित नहीं कर रहा हूं। मैं एक प्रकार्यात्मक प्रश्न पूछ रहा हूं। मुझे ऐसा लगता है कि लोकतंत्र का अर्थ है वीटो ऑफ पॉवर। लोकतंत्र आनुवांशिक सत्ता या तानाशाही सत्ता का निषेध है। लोकतंत्र का मतलब है कि कहीं न कहीं किसी न किसी मुकाम पर उन लोगों की शक्ति पर एक वीटो होना ही चाहिए जो देश पर शासन कर रहे हैं। तानाशाही में कोई वीटो नहीं है। जो एक बार राजा चुन लिया जाता है वह स्वयंभू और दैव-प्रदत्त अधिकारों के तहत शासन करता है। उसे हर पांच साल की समाप्ति पर अपनी प्रजा के बीच जाकर यह नहीं कहना होता है, ‘‘क्या आपको लगता है कि मैं अच्छा आदमी हूं? क्या आपको लगता है कि मैंने पिछले पांच वर्षों में अच्छा कार्य किया है? यदि हां तो क्या आप मुझे फिर चुनेंगे? लोगों के पास राजा की शक्ति पर लागू करने के लिए कोई वीटो नहीं होता है। लेकिन लोकतंत्र में ऐसा प्रावधान है कि सत्ताधारी लोगों को हर पांच साल बाद लोगों को हर पांच साल बाद लोगों के पास जाना ही है और उनसे पूछना है कि क्या उनकी नजर में वे इतने सुयोग्य हैं कि उनके हितों की देखभाल के लिए, उनके प्रारब्ध को आधार देने के लिए, उनकी रक्षा के लिए उन्हें शक्ति और सत्ता सौंप दी जाए। इसी को मैं वीटो कहता हूं। लोकतंत्र किसी ऐसे वीटो से संतुष्ट नहीं होता कि सरकार केवल पांच साल में एक बार लोगों के पास जाएगी और बीच के समय में सरकार की सत्ता पर प्रश्न चिन्ह् लगाने वाला कोई न हो।