500 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
हम महसूस करते हैं कि आपकी शारीरिक स्थिति के कारण आपके लिए नगापुर आना कठिन हो सकता है, परंतु हम आपके लिए कुशीनारा से नागपुर तक की हवाई या रेल यात्रा का और नागपुर में आपके ठहरने का प्रबंध कर सकते हैं। हम किसी को भेज सकते हैं जो कुशीनारा से नागपुर तक आपके साथ रहे। कृपया सूचित करें कि क्या आप हमारा आमंत्रण स्वीकार कर सकते हैं। हार्दिक धन्यवाद सहित।
आपका
(हस्ताक्षर) बी.आर. अम्बेडकर ख्1,
इस अवसर पर प्रबुद्ध भारत ने 12 अक्तूबर, 1956 को एक विशेष परिशिष्ट प्रकाशित किया।
‘‘सूचित किया गया था कि यह कार्यक्रम सबके लि. निःशुल्क है, परंतु समिति ने उनसे अनुरोध किया किय एक रुपये का चंदा देकर वे सदस्य बन जाएं। नागपुर के लोग समस्त व्यय वहन करेंगे। स्वागत समिति की सदस्यता 25 रु. थी और यह सबके लिए खुली थी।
यह सूचित किया गया कि धर्मांतरण का पंजीयन 11 अक्तूबर, 1956 से प्रारंभ होगा और कार्यालय धर्मांतरण स्थल पर भी चलता रहेगा। सभी पंजीयत प्रतिनिधियों के लिए दो टिकट जारी किए गए हैं जो धर्मांतरण स्थल में प्रवेश के लिए उपयोगी हैं।
स्वयंसेवकों को सफेद निकर और सफेद कमीज में आने का निर्देश दिया गया है। नागपुर में बाहर से आने वाले स्वयं सेवकों का मार्गदर्शन करने का उत्तरदायित्व श्री के.वी. उम्रे, श्री सच्चिदानंद मानके और श्री आर.आर. पाटिल को सौंपा गया है।
लोगों की मांग को ध्यान में रखते हुए लोगों को बंबई से नागपुर लाने के लिए रेलवे द्वारा एक विशेष रेलगाड़ी का प्रबंध किया गया था। यह ट्रेन 12 अक्तूबर, 1956 को शाम को 9ः15 मिनट पर बंबई वी.टी. से छूटेगी और उसी के अनुसार रेलवे अधिकारियों द्वारा एक नोटिस प्रकाशित किया गया था। उस सबके बावजूद नागपुर जाने वाली तमाम ट्रेनें लोगों से भरी थीं। जिस किसी स्टेशन पर ये ट्रेने रुकतीं, उनमें और ज्यादा लोग आ जाते थे। इन लोगों के रहने का प्रबंध नागपुर के स्कूलों में किया गया था।
1 वामनराव गोडबोले, पृष्ठ 266
खैर मीडे खण्ड 12, पृष्ठ 48