506 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
तत्पश्चात् अखिल भारतीय महाबोधि सोसाइटी के महामंत्री श्री वली सिंहा ने डॉ. बी.आर. अम्बेडकर को बुद्ध की प्रतिमा भेंट की।
बौद्ध धर्म को अंगीकार करने वाले प्रमुख लोग ये थे-बार बी.डी. उर्फ राजाभाऊ खोबरागड़े, अनुसूचित जाति फेडरेशन के महासचिव बी.आर. उर्फ दादा साहेब गायकवाड़, अध्यक्ष बंबई राज्य, अ.जा. फेडरेशन आर.डी. भंडारे, अध्यक्ष अ.जा. फेडरेशन बंबई क्षेत्र शताबाई दानी, सी.एन. मोहिटे, जी.टी. परमार, अध्यक्ष गुजरात शाखा अ.जा. फेडरेशन के.के. परमार, डी.जी. जाधव, सरोजिनी जाधव, बी.आर. रनपिसे, पुणे, एम.एम. ससालकर, हरिदास अवाले, सदानंद फुलजेले अहोटे, वी.एस. पगारे, एस.ए. उपश्आम, बी.एस. मोरे, बी.एच. वाराले, ढोंडीराम पगारे, यशवंत राव अम्बेडकर (डॉ. बी.आर. अम्बेडकर के पुत्र), मुकुंदराव अम्बेडकर, बी.सी. काम्बले इत्यादि।
इस अवसर पर न्यायाधीश भवानी शंकर नियोगी, श्री बी. एम. कुलकर्णी, सचिव बुद्ध समिति, श्री एम.बी. चिटनिस, प्रधानाध्यापक, मिलिंद कॉलेज औरंगाबाद और श्री बी.एस. कबीर जैसे उच्च जातियों के महानुभावों ने भी बौद्ध धर्म स्वीकार किया।
धर्मांतरण समारोह के समापन के पश्चात् विभिन्न संदेश पढ़े गए जो डॉ. बी.आर. अम्बेडकर की प्रशंसा में अभिनंदन के रूप में आए थे। कुछ चुने हुए संदेश जिनकी ओर से प्राप्त हुए वे थे-यू.बी. स्वे प्रधानमंत्री बर्मा, तथा यू नू भूतपूर्व प्रधानमंत्री बर्मा, कोलंबो के एच.डब्लू, अमरसूर्या, कलकत्ता के डॉ. अरविंद बरूआ, तथा रंगून से महाथेरो यू पन्नालोक इत्यादि। यह कार्यक्रम 11 बजे दिन में समाप्त हुआ।
14 अक्तूबर की शाम को औरंगाबाद के मिलिंद कॉलेज के छात्रों ने ‘युग यात्रा’ नामक नाटक प्रस्तुत किया।
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भाषण
उन्होंने कहा,
मेरे समस्त बौद्ध साथियों एवं उपस्थित अतिथियों :
कदाचित एक विचारक के लिए दीक्षा समारोह के स्थान के महत्व को समझ पाना कठिन है जो कल और आज सुबह संभव हुआ था। उनकी और मेरी
- प्रबुद्ध भारत-अम्बेडकर बुद्ध दीक्षा, विशेषक अंक
27 अक्तूबर, 1956