158. 15.10.1956 बौद्ध धर्म विश्व का उद्धारक होगा - Page 528

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भी राय में जो धर्मानुष्ठान कल हुआ था वो आज और आज के बाद कल होना चाहिए था। यह समझना जरूरी है कि हमने यह उत्तरदायित्व अपने कंधों पर क्यों लिया था, और कि इसकी जरूरत क्या थी और फिर उसका परिणाम क्या होगा। उसको समझकर हमारे मिशन की आधारशिला मजबूत हो जाएगी। समझने की इस की प्रक्रिया शुरूआत पहले हो जानी चाहिए थी। लेकिन कुछ चीजें इतनी अनिश्चित रहती हैं कि वे अपने आप होती चलती हैं। इस धर्मानुष्ठान के बारे में जो कुछ होना था वो हुआ। लेकिन दिनों के बदलने के सिवा कोई और नुकसान नहीं हुआ।

अनेक लोगों ने पूछा है कि इस धर्मानुष्ठान के लिए आपने नागपुर को ही क्यों चुना? यह किसी अन्य स्थान पर क्यों नहीं किया गया? कुछ लोग यह कहेंगे कि चूंकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की बड़ी भारी टुकड़ी नागपुर में है और यह धर्मानुष्ठान उनको व्याकुल करने के लिए नागपुर में किया जा रहा है। यह कतई सही नहीं है। यह धर्मानुष्ठान नागपुर में इस उद्देश्य से नहीं किया जा रहा है। हमारा मिशन इतना विशाल है कि जीवन का प्रत्येक क्षण कम हैं मरे पास अपनी नाक खुजाकर दूसरे का बुरा करने का समय नहीं है।

इस स्थान को चुनने का कारण कुछ और है। जिन लोगों ने बौद्ध इतिहास का अध्ययन किया है उनको पता होगा कि भारत में बौद्ध धर्म का प्रचार करने वाले लोग नाग थे। नाग लोग आर्यों के घोर शत्रु थे। आर्यों और अनार्यों के बीच अनेक भीषण युद्ध हुए थे। पुराणों में इसके उदाहरण मिलते हैं जिनमें आर्यों ने नागों को जला दिया था। अगस्त मुनि केवल एक नाग को बचा पाए थे। हम उसी के वंशज है। नाग लोगों ने अत्याचार सहन किए थे और उनको उठाने के लिए किसी महान पुरुष की आवश्यकता थी जो उनको गौतम बुद्ध में प्राप्त हुआ था। संपूर्ण भारत में गौतम बुद्ध की शिक्षाओं का प्रचार-प्रसार नागों ने किया था। हम ऐसे ही नाग हैं। नागों का प्रमुख आवास-स्थल नागपुर और इसके आसपास था। यह नगर इसलिए नाग-पुर, नागों का नगर कहलाता है। इस स्थान से लगभग 27 मील की दूरी पर नागार्जुन पर्वत है। पास में बह रही नदी नाग नदी है। स्पष्ट है कि इस नदी का यह नाम वहां रहने वाले लोगों के नाम पर पड़ा है। नागों के आवास के पास से बहने वाली नदी नाग है। इस स्थान को, नागपुर को चुनने का मुख्य कारण यही है। किसी को चिढ़ाने की कोई बात नहीं, यह इरादा भी नहीं। आरएसएस का कारण तो मेरे दिमाग को छूकर भी नहीं गया था। किसी को यह व्याख्या नहीं करनी चाहिए।

विरोध शायद अन्य कारणों से हो सकता था। मैं यह पहले ही स्पष्ट कर चुका हूं कि इस स्थान का चयन किसी विरोध के लिए नहीं किया गया था। उस मिशन को प्रारंभ करने के लिए अनेक लोगों और समाचार-पत्रों ने मेरी आलोचना की है।