508 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
कुछ की आलोचना बहुत कड़ी है। उनके विचार से मैं अपने गरीब अछूतों को गलत दिशा में ले जा रहा हूं। यह कहकर वे हमारे लोगों को बहका रहे हैं कि आज के अछूत, अछूत ही रहेंगे। और जो अधिकार उनको मिले हैं, उनको वे खो देंगे। हमारे बीच से अनपढ़ लोगों को वे परंपरागत रास्ते पर चलते रहने की सलाह देते हैं। इसका असर हमारे कुछ युवा और वयस्क लोगों पर पड़ रहा हो सकता है। इससे लोगों के दिमाग में कुछ संदेह पैदा हो गए हों, तो उनको दूर करना हमारा कर्तव्य है, और इन संदेह को साफ करने से हमारे आंदलोन का आधार मजबूत होगा।
पहले एक आंदोलन चला था, मांस नहीं खाने का। छूतों ने सोचा कि उनके लिए यह बिजली की कड़क है। क्या यह विचित्र चीज नहीं कि जीवित भैस का दूध वे पिएं और उसके मरने के बाद उसकी लाश को हम अपने कंधों पर ढोएं। हम उनसे पूछते हैं कि तुम अपनी मृत मां को हमें क्यों नहीं ढोने देते? उन्हें अपनी मृत मां को इस अपनी मरी हुई भैस की तरह हमें दे देना चाहिए। पत्र व्यवहार द्वारा किसी ने ‘केसरी’ में लिखा है कि कुछ गांवों में हर साल 50 मवेशी मरते हैं, जिनकी खालों, सींगों, खुर्रों, गोश्त, हड्डियों और पूछों से 500 रु. कमाए जा सकते हैं, और कि उस मरे हुए गोश्त की तो बात अलग जिसके लाभ से ये लोग वंचित रह जाएंगे। तो ‘केसरी’ के द्वारा इस तरह का कुप्रचार किया जा रहा है। सच तो यह है कि इस तरह के कुप्रचार का उत्तर देने की जरूरत ही क्या थी? हमारे लोगों को लगा कि हमारे साहेब (नेता) क्या कर रहे हैं जो इस तरह के कुप्रचार का जवाब नहीं दे रहे हैं।
एक बार एक मीटिंग के लिए मैं संगमनेर में था। वहां रात के खाने का प्रबंध किया गया था। तब ही ‘केसरी’ का एक रिपोर्टर आया और एक पर्ची दी और पूछा, ‘‘आप लोगों को मरे हुए जानवरों का मांस नहीं चाने की सलाह दे रहे हैं। वे कितने गरीब हैं। उनकी औरतों के पास साड़ी नहीं, पहनने के लिए ब्लाउज नहीं, उनके पास खाना नहीं, खेत नहीं। जब उनकी हालत इतनी दयनीय है, तब आप उनके 500 रु. साल की आमदनी छोड़ देने को कह रहे हैं जो उनको खालों, खुरों, गोश्त से होती है। क्या यह आपके लोगों का नुकसान नहीं?
मैंने पूछा, ‘‘मैं तुम्हें जवाब दूं? यहां इस गलियारे में या मीटिंग में? इसका जवाब लोगों के सामने देना बेहतर होगा।’’ मैंने उस आदमी से पूछा, ‘‘क्या आप यही जानना चाहते हैं या कुछ और भी?’’ उसने कहा, ‘‘यही काफी है और बस इसका जवाब दीजिए।’’ मैंने उस आदमी से पूछा, ‘‘तुम्हारे कितने बच्चे हैं और तुम कितने लोग हो?’’ उसने कहा, ‘‘मेरे पांच बच्चे हैं और मेरे भाई के पांच-सात हैं।’’ मैंने कहा, ‘‘इसका मतलब है कि आपका बड़ा परिवार है। इसलिए तुम्हें और तुम्हारे