5. 8.8.1930 एक देश, एक संविधान एक और भाग्य की भावना से जुड़े लोग स्वाधीन होने का जोखिम उठाते हैं। - Page 53

32 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

की तैसी ही बनी रहेगी, यानी कि यथावत। अल्पसंख्यकों के संरक्षण तथा बचाव को ध्यान में रखते हुए, अगर अल्पसंख्यकों के हित में वास्तव में कुछ सुधार लाना हैं तथा अल्पसंख्यकों की सहायता के लिए शक्ति संतुलन का पलड़ा झुकाना है तो जनसंख्या के अनुपात से बने हिस्से से कुछ अधिक प्रतिनिधित्व देकर ही किया जा सकता है।

  1. सभी अल्पसंख्यक प्रतिनिधि संख्या में अधिमान के सिद्धान्त से तो सहमत हैं परन्तु इसे लागू कैसे किया जाये पर एकमत नहीं हैं। मुझे ऐसा लगता है कि यह अधिमान की कार्य शैली को पूर्णतया न समझ पाने के कारण है। मेरे ऊपर के कथनानुसार अधिमान की योजना का तत्कालिक प्रभाव अल्पसंख्यकों की भुजा अगर अपने संरक्षण के लिए छोटी पड़ती हो तो उसे लम्बी करना है। भुजा को कितना और लम्बा किया जाए इस बात पर निर्भर करेगा कि भुजा कितनी छोटी पड़ रही है। अगर भुजा छोटी है तो जोड़े जानी वाली भुजा लम्बी रखी जाएगी, अगर भुजा लम्बी है तो भुजा जोड़ने की बजाय कम करनी होगी। इसी बात को और तरह से भी समझाया जा सकता है कि सभी अल्पसंख्यकों के लिए यह अधिमान सहायता एक समान नहीं हो सकती। अल्पसंख्यक के सामाजिक स्तर के अनुसार यह अधिमान सहायता कम या ज्यादा होगी। अगर अल्पसंख्यक समाज का सामाजिक स्तर ऊंचा है तो अधिमान सहायता कम होगी और अगर सामाजिक स्तर निम्न है तो अधिमान सहायता अधिक होगी। दुर्भाग्यवश कुछ एक अल्पसंख्यक समुदायों में यह प्रवृति पाई जाती है कि वे अपने आप को एक आम नागरिक के स्तर से ऊँचे स्तर का दिखावा कर ज्यादा प्रतिनिधित्व की मांग पर एकल अधिकार जताते हैं। इस तथ्य के आधार पर कि उनके अल्पसंख्यक समुदाय का स्तर ऊँचा है न कि स्तर नीचा होने की शर्त पर। जैसा कि मैंने कहा कि अल्पसंख्यक को अधिमान सहायता की यथार्थता एक मेमने (जिसकी शीतकाल में पूरी ऊन कटवा दी गई हो) को शीत हवाओं से बचाना मात्र है और ऊपर बताई विकृति से बचाव करना अति-आवश्यक है क्योंकि इस प्रकार के आचरण से देश व दूसरे अल्पसंख्यकों के हितों की हानि होगी।

  2. अभी तक मैंने अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व में अधिमान सहायता के सही मायने और उचित उपयोग के बारे में ही चर्चा की तथा दिशा निर्देशों की ओर ध्यानाकर्षित किया। यह प्रश्न शेष है कि अधिमान सहायता कितनी मात्रा में दी जाए। यह मात्रा परिस्थितियों के अनुसार बदलती रहनी चाहिए और मैं इस सम्बन्ध में इसके अंकलन के लिए एक सूत्र सुझाने से अधिक कुछ