510 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
और क्या प्रयास करने हैं। मेरी जेब (धर्मानुष्ठान के प्रत्यक्षदर्शियों का कथन है कि डॉ. अम्बेडकर ने बैग शब्द के स्थान पर ‘मेर कोट की जेब में’ शब्दों का इस्तेमाल किया था।) भरा पड़ा है समाधानों से। ये कौन है जिन्हें मैं अच्छी तरह से जानता हूं। इन अधिकारों को मैंने अपने लोगों के लिए हासिल किया है, वह इनको फिर से हासिल कर लेगा। इन अधिकारों और सुविधाओं को अगर मैंने प्राप्त किया है, तो मुझे विश्वास है कि मैं उनको दोबारा प्राप्त कर लूंगा। इसलिए कम से कम अब तक तो मुझ में विश्वास बनाए रखना चाहिए कि विरोध प्रचार में कोई सच नहीं है।
मुझे इस चीज पर आश्चर्य है। हर जगह बड़े स्तर पर बहस चल रही है। लेकिन किसी ने मुझसे एक सवाल नहीं पूछा है कि मैंने बौद्ध धर्म क्यों अपनाया। मैंने यही धर्म क्यों अंगीकर किया अन्य क्यों नहीं? धर्मांतरण के बाद भी कुछ लोग इसी वाक्यांश के उद्धृत करते रहे थे-संपादक गण। धर्मांतरण के किसी भी आंदोलन में यह सबसे मूल और महत्वपूर्ण सवाल है। धर्मांतरण के समय यह प्रश्न किया जाना चाहिए-कौन-सा धर्म और इसे क्यों अंगीकार करना चाहिए। हिंदू धर्म छोड़ने के आंदोलन की शुरूआत हमने 1935 के येओल के प्रस्ताव के माध्यम से की थी। मैंने बहुत पहले यह प्रण किया था, ‘‘हालांकि मेरा जन्म हिंदू के तौर पर हुआ था, पर मैं हिंदू के तौर पर मरूंगा नहीं,’’ और इसे मैंने कल सिद्ध कर दिया। मुझे बहुत खुशी है, मैं बहुत उत्साहित हूं। मुझे लगता है कि मैं जेल से रिहा कर दिया गया हूं। मैं अंधभक्ति नहीं चाहता। जो लोग बौद्ध धर्म अपनाना चाहते हैं, उनको समझ-बूझ कर करना चाहिए।
मानव जाति के विकास के लिए धर्म पूरी तरह से आवश्यक है। मैं जानता हूं कि कार्ल मार्क्स को पढ़ने के बाद एक संप्रदाय पैदा हुआ था जिसके अनुसार धर्म निरर्थक है। उनके लिए धर्म का कोई महत्व नहीं है। सुबह उनको डबलरोटी, मक्खन, क्रीम, मुर्गे की टांग आदि का नाश्ता मिलता है। भरपेट भोजन और गहरी नींद मिलती है। वे फिल्में देखते हैं, और बस। उनका दर्शन यही है। मैं उस विचार का नहीं। मेरे पिता गरीब थे, मुझे इस तरह के ऐश नसीब नहीं हुए। मेरी तरह की सरल जिंदगी किसी ने नहीं जी है। इसलिए मुझे यह समझ है कि ऐशो-आराम की गैरमौजूदगी में मनुष्य का जीवन कितना सरल हो सकता है। मैं जानता हूं कि आर्थिक प्रगति का आंदोलन आवश्यक है। मैं उसके खिलाफ नहीं। मनुष्य को आर्थिक प्रगति करनी चाहिए।
लेकिन इस मामले में मैं एक महत्वपूर्ण अंतर करता हूं। भैस, बैल और इंसान में अंतर है। भैस और बैल को हर दिन चारा चाहिए। इंसान को भी भोजन चाहिए। लेकिन दोनों में अंतर यह है कि भैस और बैल में मस्तिष्क नहीं होता। मनुष्य के पास शरीर और मस्तिष्क दोनों हैं। इसलिए विचार दोनों पर करना चाहिए। मस्तिष्क