158. 15.10.1956 बौद्ध धर्म विश्व का उद्धारक होगा - Page 533

512 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

मैंने उनसे कहा, ‘‘आम खर्च के अतिरिक्त मुस्लिमों की शिक्षा के लिए अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी पर आप हर साल तीन लाख रुपये खर्च करते हैं। उसी तरह से तीन लाख रुपये आप बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी को देते हैं। लेकिन हम न तो हिंदू हैं न मुस्लिम। अगर आप हमारे लिए कुछ करने की साचते हैं, तब उनकी तुलना में हमारे लिए हजार गुना अधिक करना चाहिए। कम से कम मुस्लिमों जितना तो करिए।’’ इस पर लार्ड लिन्लिथगो ने कहा, ‘‘आपको जो कुछ कहना है लिखकर दीजिए।’’ तो मैंने एक स्मृतिपत्र (मेमारंडम) तैयार किया, जो अब तक मेरे पास है। यूरोपीयन को बहुत सहानुभूति थी। उन्होंने मेरा प्रस्ताव मान लिया। समस्या यह थी कि पैसा किस मद में खर्च किया जाए? उन्होंने सोचा कि हमारी लड़कियां शिक्षित नहीं हैं, उनको शिक्षा देनी चाहिए। उनके लिए होस्टल शुरू किया जा सकता है और पैसा उस पर

खर्च करना चाहिए। अगर हमारी लड़कियों को शिक्षा मिलती है और वे शिक्षित की जाती हैं, तो हमारे घर पर तरह-तरह की चीजें बनाने का सामान कहां है? उनकी शिक्षा का कुल नतीजा क्या होगा? सरकार हमारे ऊपर खर्च करे और शिक्षा की राशि रोक ले। इसलिए शिक्षा पर खर्च पर बात करने के लिए मैं एक दिन लार्ड लिंन्तिथगो के यहां गया। मैंने कहा, ‘‘अगर आप नाराज न हों तो मैं आपसे एक सवाल पूछना चाहूंगा। मैं अकेला पचास ग्रेजुएटों के बराबर हूं, हूं ना?’’ उनको मानना पड़ा। फिर मैंने पूछा, ‘‘इसकी वजह क्या है?’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम वजह नहीं जानते।’’ मैंने कहा, ‘‘मेरा ज्ञान इतना ज्यादा है कि मैं महल की चोटी पर बैठ सकता हूं। ‘‘मुझे ऐसे लोग चाहिए। क्योंकि वहां से कोई पूरी निगरानी कर सकता है। हमारे लोगों को सुरक्षा चाहिए और फिर तेज नजर वाले लोग पैदा करने चाहिए। कोई बाबू क्या कर सकता है? उस समय लार्ड लिंन्तिथगो मेरी बातों से सहमत हो गए और उच्च शिक्षा के लिए 16 लोगों को इंग्लैंड भेज दिया गया। जैसे कि मिट्टी के कुछ बरतन अधपके रह जाते हैं और कुछ पक जाते हैं, वैसे ही यह अलग मामला है। बाद में सी. राजगोपालाचारी ने उच्च शिक्षा की इस योजना को खत्म कर दिया।

इस देश में ऐसे हालात हैं जो हमें आने वाले हजारों साल तक के लिए हताश कर देंगे। जब तक यह स्थिति है, तब तक हमारी प्रगति के लिए कोई उत्साह नहीं हो सकता है। इस मामले में इस धर्म में बने रहकर हम कुछ नहीं कर सकते हैं। मनुस्मृति में चर्तुवर्ण है। चर्तुवर्ण व्यवस्था मानव जाति की प्रगति के लिए बहुत हानिकारक है। मनुस्मृति में कहा गया है कि शव को केवल शारीरिक श्रम करना चाहिए। उनको शिक्षा की क्या जरूरत? ब्राहा्रणों को शिक्षा लेनी चाहिए, क्षत्रियों को हथियार लेने चाहिए, वैश्यों को व्यापार करना चाहिए, और शद्रों को सेवा करनी चाहिए। इस व्यवस्था को कौन खोलेगा। ब्राह्मणों क्षत्रियों और वैश्यों को कुछ लाभ है, लेकिन शूद्रो को क्या?