514 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
कुछ लोग कहते है, ‘धर्मातरण करने में आपने इतना समय क्यों लिया? इन तमाम दिनों आप क्या कर रहे थे? यह महत्वपूर्ण प्रश्न है। धर्म को बदलना आसान काम नहीं है। यह एक व्यक्ति का मिशन नहीं है। जो कोई धर्म के बारे में सोचता है, यह जानता है। दुनिया में किसी के कंधे पर इतनी जिम्मेदारी नहीं जितनी मुझ पर है। अगर मुझे लंबा जीवन मिलता है, मैं अपना काम पूरा करूंगा (‘‘डॉ. बाबा साहेब अम्बेडकर अमर रहे’’ के नारे)।
कुछ लोग यह कहेंगे कि महार यदि बौद्ध बन जाते है तो क्या होगा। मैं उनसे कहता हूं कि उनको ऐसा नहीं कहना चाहिए। उनके लिए यह खतरनाक होगा। उच्च और धनाढय वर्ग को धर्म की जरूरत महसूस नहीं होगी। उनके बीच के अफसरों के पास रहने को बंगले हैं, सेवा करने को नौकर-चाकर हैं, उनके पास पैसा है, संपत्ति है और सम्मान है। इस प्रकार के लोगों को धर्म के बारे में सोचने की जरूरत नहीं।
धर्म गरीब के लिए जरूरी है। धर्म उत्पीडि़तों, दलित लोगों के लिए आवश्यक है। गरीब आदमी आशा पर जिंदा रहता है। जीवन का आधार आशा है। अगर आशा नहीं रहती है, तो जीवन का क्या होगा? धर्म आशावान बनाता है, और गरीबों तथ दलितों को संदेश देता है, भयभीत मत हो। यह अवश्य होगा। गरीब और दलित इसीलिए धर्म से चिपके रहते हैं।
यूरोप में जब ईसाई धर्म ने प्रवेश किया, रोम और पड़ोसी देशों की स्थिति बहुत बुरी थी। लोगों को पर्याप्त भोजन नहीं मिलता था। गरीबों के बीच खिचड़ी बांटी जाती थी। ईसा के अनुयायी कौन बने? गरीब और दलित। यूरोप के गरीब और निचले तबके के लोग ईसाई बन गए। गिब्बन ने कहा था कि ईसाइयत भिखारियों का धर्म है। गिब्बन इसका उत्तर देने को जीवित नहीं कि ईसाई धर्म यूरोप में सबका धर्म कैसे बन गया, अन्यथा उनको इसका उत्तर देना होता।
कुछ लोग कहेंगे कि बौद्ध धर्म महारों और मांगों का है। ब्राहा्रण लोग भगवान को ‘भो गौतम’ अर्थात् ‘अरे गौतम’ कहकर पुकारते थे। भगवान बुद्ध को ब्राहा्रण इसी तरह से चिढ़ाते थे। उनको देखना चाहिए कि विदेशों में, राम, कृष्ण और शंकर की मूर्तियां यदि बेची जाएं तो कितनी बिकती हैं। इसके विपरीत यदि भगवान बुद्ध की मूर्ति बेचने के लिए रखी जाती हैं तो एक भी मूर्ति नहीं बचेगी (जोरदार तालियां)। भारत में यह बहुत है, कुछ चीज बाहर जाकर दिखाइए, दुनिया में जाना-पहचाना नाम बुद्ध का है। तो इस धर्म का प्रचार कैसे रोका जाएगा।
हम अपने रास्ते चलेंगे आप अपने पर चलिए। हमने अपना रास्ता पा लिया