158. 15.10.1956 बौद्ध धर्म विश्व का उद्धारक होगा - Page 537

516 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

साधारण व्यक्ति थे और उनकी मां एक साधारण स्त्री। अगर महसूस करते हैं इस धर्म को स्वीकार करिए। यह धर्म आपके विवेक को सही लगता है तो इसे स्वीकार करिए। किसी अन्य धर्म में ऐसी उदारता नहीं।

बुद्ध धर्म का मूल आधार क्या है? बौद्ध धर्म और अन्य धर्मों में भारी अंतर है। दूसरे धर्मों में परिवर्तन करना संभव नहीं, क्योंकि वे मनुष्य को ईश्वर से जोड़ते हैं। अन्य धर्म यह उपदेश देते हैं कि प्रकृति को ईश्वर ने पैदा किया है। आकाश, वायु, चंद्रमा, सूरज आदि-सबकी रचना ईश्वर ने की है। भगवान ने हमारे करने के लिए कुछ नहीं छोड़ा है इसलिए हमें भगवान की पूजा करनी चाहिए। ईसाई धर्म के अनुसार मृत्यु एक न्याय का दिन होता है, और सब कुछ उसके न्याय पर निर्भर है। बौद्ध धर्म में ईश्वर और आत्मा का कोई स्थान नहीं। भगवान बुद्ध ने कहा समस्त विश्व में दुख है, 90 प्रतिशत लोग दुख झेल रहे हैं। इन गरीब और उत्पीडि़त लोगों को दुख से मुक्त करना ही बौद्ध धर्म का प्रमुख काम है। कार्ल मार्क्स उसे अलग क्या कहते हैं जो बुद्ध कह रहे हैं? भगवान बुद्ध ने कुछ भी टेढ़े-मेढ़े ढंग से नहीं कहा। भाइयों जो मैं आपसे कहना चाहता था, वो कह चुका हूं। यह धर्म हर मामले में परिपूर्ण है। इस पर कोई दाग नहीं है। हिंदूवाद के सिद्धांत ऐसे हैं कि जिनसे कोई उत्साह पैदा नहीं हो सकता। हजारों साल से आज तक हमारे समाज से एक भी स्नातक या शिक्षित व्यक्ति पैछा नहीं हुआ। मुझे यह बताने में कोई झिझक नहीं कि मेरे स्कूल में जो एक औरत झाड़ू लगाती थी, वो मराठा थी। वह मुझे छूती नहीं थी। मेरी मां कहती थी कि बड़े व्यक्ति को मामा कहना चाहिए। मैं डाकिए को मामा कहता था (जोर की हंसी)। बचपन में मुझे अपने स्कूल में प्यास लगी। मैंने अपने अध्यापक से कहा। अध्यापक ने मेरे बचाव के लिए चपरासी बुलाया और उससे मुझे नल तक ले जाने को कहा। हम नल तक गए। चपरासी ने नल खोला। मैंने पानी पिया। स्कूल में आमतौर पर मुझे पीने को पानी नहीं मिलता था। बाद में मेरे पास जिला जज बनने का प्रस्ताव मिला। लेकिन मैं उस तरह के काम पर आस्थावान नहीं था। मेरी समस्या थी-मेरे भाइयों का मिशन कौन आगे बढ़ाएगा। इसलिए मैं उस बंधन में नहीं पड़ा।

व्यक्ति के तौर पर मेरे लिए इस देश में कुछ भी असंभव नहीं (तालियां)। आपके सिर पर वैश्य, क्षत्रिय और ब्राहा्रण सिर के ऊपर बिठाए हैं वे नीचे गिरेंगे। यह असली सवाल है। अतः आपको इस धर्म से संबंधित पूरी जानकारी देना मेरा कर्तव्य है। पुस्तकें लिखकर मैं आपके सारे संदेहों और सारी आशंकाओं को समाप्त कर दूंगा और आपको संपूर्ण ज्ञान की अवस्था तक ले जाने का प्रयास करूंगा। कम से कम इस समय तो आपको मुझ पर विश्वास करना चाहिए।

परंतु आपका भी उत्तरदायित्व बड़ा है। आपका आचरण ऐसा होना चाहिए